
प्रदेश का यह जिला बहराइच से चालीस किमी दूर है. बौद्ध तपस्थली के तौर पर इस जिले को पहचाना जाता है. प्राचीन काल में यह कौशल देश की दूसरी राजधानी था. इसके अलावा भगवान राम के पुत्र लव ने इस जिले को अपनी राजधानी भी बनाया था. 22 मई 1997 को यह जिला अस्तित्व में आया था लेकिन जनवरी 2004 में शासन ने इस जिले का अस्तित्व समाप्त कर दिया था. जून 2004 में फिर से इसे जिले के रूप में मान्यता दे दी गई.
2008 में परिसीमन के बाद इस विधानसभ सीट का गठन हुआ था. यहां पर 2012 और 2017 में दो विधानसभा चुनाव हुए हैं. 2012 में हुए पहले चुनाव में समाजवादी ने इस सीट पर कब्जा जमाया था. सपा के मोहम्मद रिजवान ने बहुजन समाज पार्टी के विनोद त्रिपाठी का हराया था.
इसके बाद 2017 के चुनावों की बात करें तो एक बार सपा के मोम्मद रिजवान इस सीट से खड़े हुए थे. लेकिन इस साल मोदी लहर के कारण सपा को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी. भारतीय जनता पार्टी के राम फेरान ने सपा के रिजवान को हरा दिया. हलांकि जीत का अंतर ज्यादा नहीं था, वे 445 मतों से ही जीते थे.
जातीय समीकरण देखें तो इस सीट पर सबसे ज्यादा दलित मतदाता हैं. वहीं दूसरे नम्बर पर मुस्लिम और तीसरे नम्बर पर पिछड़ा वर्ग है. ऐसे में यहां पर सपा और बसपा को अपनी जगह बनाने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है. लेकिन मोदी लहर के कारण भाजपा प्रत्याशी पर भी लोग विश्वास जताते हैं. आगामी चुनाव में सपा और भाजपा में मुख्य मुकाबला हो सकता है. लेकिन साथ ही बसपा भी इन्हें कड़ी टक्क्कर दे सकती है.
यहां कुल मतदाता 336973 हैं. इनमें से महिला मतदाता 151950 और पुरुष मतदाता 185023 हैं.
