प्रयागराज: यूपी में माफिया और बाहुबलियों का वर्चस्व पिछले कई सालों तक विधानसभा, लोकसभा या फिर पंचायत चुनावों में देखने को मिला है. हालांकि मौजूदा समय में कई बाहुबली सियासी मैदान से बाहर हैं, लेकिन कई ऐसे भी जिन्होंने जेल की सलाखों के पीछे से अपने परिवार के सदस्यों को चुनावी मैदान में उतारा है. ऐसे ही प्रयागराज में दो बाहुबलियों ने अपनी पत्नियों को चुनावी मैदान में उतारा है. उनकी पत्नियां अलग-अलग विधानसभा से उम्मीदवार हैं. पहला नाम नैनी जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे बाहुबली पूर्व विधायक उदय भान करवरिया की पत्नी मौजूदा विधायक नीलम करवरिया का है. वह प्रयागराज के मेजा विधानसभा से बीजेपी के टिकट पर दूसरी बार चुनावी मैदान में हैं. वहीं, दूसरा नाम जिले के प्रतापपुर विधानसभा से स्वर्गीय पूर्व विधायक जवाहर पंडित की पत्नी विजमा यादव का है. विजमा समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं जवाहर पंडित की हत्या मामले में उदय भान करवरिया काट रहे उम्र कैद विजमा यादव के पति जवाहर पंडित की सन् 1996 में प्रयागराज के सिविल लाइंस में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जवाहर पंडित उस समय समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक थे. उनकी सपा के कद्दावर नेताओं में और उस वक्त के बड़े बाहुबलियों में गिनती हुआ करती थी. जवाहर पंडित की हत्या का आरोप प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल में सजा काट रहे उदय भान करवरिया, उनके भाई पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया और पूर्व एमएलसी सूरज भान करवरिया व उनके अन्य करीबियों पर लगा था.
एके-47 से की गई थी जवाहर पंडित की हत्या
बताया जाता है कि जवाहर पंडित की हत्या एके-47 से की गई थी. घटना उस वक्त की है जब जवाहर पंडित अपने विधानसभा क्षेत्र से निकलकर सिविल लाइंस होते हुए प्रयागराज के अशोक नगर स्थित घर के लिए जा रहे थे. तभी पहले से घात लगाए बैठे बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग करके उन्हें मौत की नींद सुला दिया. उस वक्त घटना के चश्मदीद रहे लोगों के बयानों के आधार पर उनके प्रतिद्वंदी बीजेपी के नेता पूर्व विधायक उदय भान करवरिया, पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया, पूर्व एलएलसी सूरज भान करवरिया, कल्लू करवरिया समेत कई उनके करीबियों पर आरोप लगा था.
लंबे समय तक मुकदमे का ट्रायल प्रयागराज के जिला न्यायालय में चलने के बाद वर्ष 2020 में प्रयागराज के जिला न्यायालय में तीनों भाइयों समेत चार व्यक्तियों को जवाहर पंडित की हत्या का दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुना दी है. तीनों भाई मौजूदा समय में प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं. एक बार फिर चुनावी मैदान में दोनों बहुबलियों की पत्नियां
उदय भान की पत्नी नीलम करवरिया मौजूदा समय में बीजेपी की मेजा विधानसभा से विधायक हैं. बीजेपी ने नीलम करवरिया को दूसरी बार चुनाव मैदान में उतारा है. बताया जा रहा है कि उदय भान करवरिया जेल से ही चुनावी गोटियां फिट करने में जुटे हैं. वहीं समाजवादी पार्टी ने जवाहर पंडित की पत्नी विजमा यादव को प्रयागराज के यादव बाहुल्य प्रतापपुर विधानसभा से दूसरी बार उम्मीदवार बनाया है. वर्ष 2017 में प्रतापपुर विधानसभा से विजमा यादव बसपा के मुस्तफा सिद्दीकी से चुनाव हार गई थी. हालांकि 2012 विधानसभा चुनाव में विजमा यादव ने सपा के टिकट पर पूर्व में झूंसी विधानसभा रही सीट से विधायक बनी थीं. 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों बाहुबलियों की पत्नियां एक बार फिर से चुनावी मैदान में हैं. हत्या के पीछे बालू व्यवसाय है वजह जवाहर पंडित की हत्या की वजह के पीछे बालू व्यवसाय बताया जाता है. बालू के व्यवसाय पर एक लंबे अरसे तक करवरिया बंधुओं का गंगा और यमुना के घाटों पर कब्जा रहा. करवरिया बंधुओं के इशारे पर ही प्रयागराज और कौशांबी के गंगा-यमुना के घाटों से बालू का खनन होता था. इसी खनन के बीच जवाहर पंडित ने भी विधायक बनने के बाद दावेदारी पेश कर दी थी. बताया जाता है कि जवाहर पंडित ने सीधे तौर पर करवरिया बंधुओं के व्यवसाय को चुनौती दी, जिसके बाद वह करवरिया परिवार के निशाने पर आ गए. नतीजतन 1996 में उनकी दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई. 23 वर्षों तक कोर्ट में चले ट्रायल के बाद करवरिया बंधुओं को सजा हुई थी.
