🟡माया के रहस्य से लेकर मां कात्यायनी की महिमा तक, भक्तिमय हुई देवी भागवत कथा
🟢श्रीमद् देवी भागवत कथा के छठवें दिन मां कात्यायनी की महिमा और महामाया के रहस्य का वर्णन, बच्चों की झांकी ने मोहा मन
प्रदीप बच्चन (व्युरो चीफ)
बलिया (यूपी)। पुर के उत्तर टोला स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के छठवें दिन कथावाचक पंडित शीतल प्रकाश जी महाराज ने मां दुर्गा के छठवें स्वरूप मां कात्यायनी की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। साथ ही राजा जनमेजय और महर्षि वेदव्यास के संवाद के माध्यम से महामाया की शक्ति, माया के रहस्य और आध्यात्मिक जीवन में उसके महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर भोजपुरी सरधा मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शैलेश कुमार सिंह, संगीत शिक्षक गुड्डू गुलशन एवं विजय प्रताप सिंह ने महाराज श्री का माल्यार्पण कर अभिनंदन किया।
महाराज श्री ने श्रीमद् देवी भागवत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि राजा जनमेजय ने महर्षि वेदव्यास से माया के स्वरूप और उसके महत्व के विषय में प्रश्न किया था। इसके उत्तर में महर्षि व्यास ने देवर्षि नारद और भगवान श्रीहरि विष्णु से जुड़ी अद्भुत कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि आदिशक्ति जगदंबा ही महामाया के रूप में समस्त सृष्टि में व्याप्त हैं। उनकी शक्ति से ही सृष्टि का संचालन होता है। माया के प्रभाव से जीव सांसारिक मोह-ममता में बंध जाता है, जबकि देवी की कृपा और भक्ति से आध्यात्मिक ज्ञान का मार्ग प्रशस्त होता है।
मां कात्यायनी की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मां का स्वरूप शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। उनकी आराधना से भक्तों को आत्मबल, सकारात्मकता और सदाचार की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मां भगवती की भक्ति के साथ सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
इस अवसर पर छोटे-छोटे बच्चों ने मां भगवती की मनमोहक झांकी प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। बच्चों की आकर्षक प्रस्तुति से कथा स्थल का वातावरण भक्तिमय हो उठा। मां भगवती के जयकारों से पूरा दुर्गा मंदिर परिसर गूंजता रहा और श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया।
इस दौरान मुख्य रूप से भोजपुरी सरधा मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शैलेश कुमार सिंह, गुड्डू गुलशन यदुवंशी, विजय प्रताप सिंह, पिंटू सिंह, भरत गुप्ता, विनय गुप्ता, नीतीश गुप्ता, प्रशांत गुप्ता, सुमन्त चौबे सहित सैकड़ों क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

