बलिया (उत्तर प्रदेश) | प्रदीप बच्चन (ब्यूरो चीफ)
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित किया है। इस ऐतिहासिक फैसले का नव भारतीय नारी विकास समिति (बहेरी, बलिया) ने स्वागत किया है। संगठन ने इसे देश में बाल विवाह विरोधी अभियान चला रहे नागिरक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन' (JRC) के अथक प्रयासों की वैश्विक जीत बताया। नव भारतीय नारी विकास समिति भी जेआरसी का ही एक सहयोगी संगठन है। बाल विवाह के खिलाफ जमीनी अभियान चला रहे ...(नव भारतीय नारी विकास समिति बहेरी,बलिया उतर प्रदेश) ने संयुक्त राष्ट्र के 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित करने के ऐतिहासिक कदम का स्वागत किया है। संगठन ने कहा कि यह सरकार व प्रशासन के सहयोग से देश में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहे नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के अथक और असाधारण प्रयासों को वैश्विक मान्यता है। संगठन (नव भारतीय नारी विकास समिति ) जेआरसी का एक सहयोगी संगठन है। जेआरसी लंबे समय से इस दिवस की मांग कर रहा था।
शिक्षक दिवस पर हुए एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ...(नव भारतीय नारी विकास समिति बहेरी, बलिया, उत्तर प्रदेश) के निदेशक (अजहर अली ) ने कहा कि भारत से उठी आवाज आज पूरी दुनिया का संकल्प बन गई है। उन्हें खुशी है कि आज उनके प्रयासों को वैश्विक मान्यता मिली है। साथ ही यह पूरे भारत के लिए भी गर्व का विषय है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र ने बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक दिवस के लिए 27 नवंबर की तारीख चुनी। 2024 में इसी दिन भारत सरकार ने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन जैसे नागरिक समाज संगठनों को साथ लेकर ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी। लेकिन यह जश्न मनाकर रुक जाने का क्षण नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की घोषणा ने हमें गौरव दिया है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि दुनिया के हर बच्चे को बाल विवाह मुक्त बचपन भी मिले। हमारे सामने इस संकल्प को जमीन पर उतारने की चुनौती भी है। जब तक जिले के किसी गांव का एक भी बच्चा बाल विवाह के डर में जी रहा है, तब तक हमारी लड़ाई अधूरी है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ....(बलिया ) में हमने सरकार व प्रशासन के साथ मिलकर कानूनी हस्तक्षेपों से...(600 )इन बाल विवाह रुकवाए हैं।
उन्होंने आगे कहा, “हम जानते हैं कि सिर्फ कानून से ही बाल विवाह की पूरी तरह रोकथाम संभव नहीं होगी। इसलिए हमने बड़े पैमाने पर स्कूलों, पंचायतों, गांवों में जागरूकता अभियान चलाया है। लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है। साथ ही बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया है और पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों का दोबारा स्कूलों में दाखिला कराया है। इसके अलावा बाल विवाह के खिलाफ मुहिम में धर्मगुरुओं व शिक्षकों को जोड़कर हमने इसे सही मायने में जन अभियान बनाया है जिसकी गूंज संयुक्त राष्ट्र तक सुनाई दे रही है।”
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने बाल विवाह के खात्मे के लिए एक अलग अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की पहल की थी। मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में भुवन ऋभु ने अपने संबोधन के दौरान कई वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में एक बार फिर बाल विवाह के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही। तब अफ्रीकी देश सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ. फातिमा मादा बायो भी मौजूद थीं, जिन्होंने इस पहल का समर्थन किया। इसके बाद सिएरा लियोन ने भारत सहित करीब 50 देशों के समर्थन वाला प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया। जिसमें 27 नवंबर को बाल विवाह समाप्त करने के लिए समर्पित वैश्विक दिवस घोषित करने की मांग थी। 4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र ने इस प्रस्ताव को पारित कर दिया।
भारत में जेआरसी अपने सहयोगी संगठनों के साथ देश के सभी 782 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहा है। जेआरसी ने अपने सहयोगी संगठनों के साथ सरकारों और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से समुदायों, स्कूलों, पंचायतों, आदिवासी और वंचित समुदायों, महिलाओं, पुलिसकर्मियों, धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों को बाल विवाह रोकने के लिए एकजुट किया है। जेआरसी के सहयोगी संगठनों ने देश में 5,50,000 से अधिक बाल विवाह रुकवाएं हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार, नागरिक समाज और समुदाय मिलकर काम करते हैं, तो बाल विवाह को रोका जा सकता है और अंततः पूरी तरह समाप्त भी किया जा सकता है।
इस मुहिम का प्रभाव बाल विवाह की दर में आई गिरावट में भी साफ नजर आता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-21) के अनुसार देश में 23.3 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो चुकी थी, जबकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 (2023-24) में यह आंकड़ा घटकर 20.1 फीसदी रह गया। वहीं भारत सरकार ने 2026 तक बाल विवाह की दर को 10 फीसदी तक घटाने का लक्ष्य रखा है। केंद्र और राज्य, दोनों ही स्तरों पर लगातार किए जा रहे प्रयासों की बदौलत उम्मीद है कि 2026 खत्म होते-होते भारत में बाल विवाह की दर 15 फीसदी से भी नीचे आ जाएगी। यह 2030 तक बाल विवाह को समाप्त करने की वैश्विक प्रतिबद्धता सतत विकास लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) के लक्ष्य 5.3 के अनुरूप है। जिसमें बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह जैसी सभी नुकसानदेह प्रथाओं को खत्म करने की बात कही गई है।
जागरूकता और सामाजिक जुड़ाव से बदलाव निदेशक ने बताया कि केवल कानून बनाकर इस कुप्रथा को खत्म नहीं किया जा सकता।
इसके लिए: पंचायतों, स्कूलों और गांवों में व्यापक जागरूकता अभियान और शपथ ग्रहण आयोजित किए गए। बाल विवाह के प्रति संवेदनशील गरीब परिवारों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा गया।ड्रॉपआउट (पढ़ाई छोड़ चुके) बच्चों का दोबारा स्कूलों में दाखिला कराया गया।
धर्मगुरुओं और शिक्षकों को जोड़कर इसे एक सशक्त जन अभियान का रूप दिया गया।
आंकड़ों में सुधार और लक्ष्य
देशभर में नेटवर्क: जेआरसी भारत के सभी 782 जिलों में अपने सहयोगियों के साथ सक्रिय है।
सफलता: जेआरसी और उसके सहयोगी संगठनों ने अब तक 5,50,000 से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं।
राष्ट्रीय गिरावट: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार देश में 18 वर्ष से कम उम्र में लड़कियों के विवाह की दर 23.3% थी, जो NFHS-6 (2023-24) में घटकर 20.1% पर आ गई है।
आगामी लक्ष्य: भारत सरकार ने 2026 के अंत तक इस दर को 15% से नीचे लाने का लक्ष्य रखा है, जो संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 5.3 (SDG 5.3) के अनुरूप है।

