प्रयागराज में सीएम योगी का बड़ा ऐलान: अधिवक्ताओं को मिलेगा 5 लाख तक का कैशलेस इलाज, कल्याण निधि की राशि भी बढ़ी
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प्रयागराज में सीएम योगी का बड़ा ऐलान: अधिवक्ताओं को मिलेगा 5 लाख तक का कैशलेस इलाज, कल्याण निधि की राशि भी बढ़ी


प्रयागराज 14 सितम्बर, 2026। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में मा0 मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि नई पीढ़ी के अधिवक्ता संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी बनें और न्याय को जमीनी धरातल तक पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं। मा0 मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश के हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय सभी अधिवक्ताओं को सालाना पांच लाख रुपये तक की कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस सुविधा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के चैम्बर में फर्नीचर व उपकरण के लिए शासन सहयोग करेगा और 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट दिए जाएंगे। इसके साथ ही राज्य विधि अधिकारियों की फीस में भी 50 फीसदी से अधिक वृद्धि की गई है।


     उन्होंने कहा कि 2017 से पहले यूपी पुलिस में 45 से 50 प्रतिशत पद खाली थे। व्यवस्था में पारदर्शिता-जवाबदेही, कानून-व्यवस्था और न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी चुनौती थी। वहीं अब पुलिस प्रशिक्षण क्षमता 3,000 से बढ़ाकर 60,000 कार्मिक प्रतिवर्ष की गई है। पहले 10 जनपदों में जिला अदालतें अस्थायी व किराए के भवनों में चलती थीं और अधिवक्ताओं के चैम्बर जर्जर थे। अब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए एडवोकेट चैम्बर बनाए जा चुके हैं। उन्होंने अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि 1.5 लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये और अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को आर्थिक सहायता की पात्रता आयु 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की घोषणा की है

अधिवक्ताओं और विधि अधिकारियों के लिए प्रमुख घोषणाएं

5 लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा: प्रदेश के हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय सभी अधिवक्ताओं को सालाना 5 लाख रुपये तक की कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस सुविधा दी जाएगी।


अधिवक्ता कल्याण निधि में बड़ा इजाफा: अधिवक्ता कल्याण निधि (Advocate Welfare Fund) की राशि को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है।


आर्थिक सहायता की उम्र सीमा बढ़ी: अधिवक्ता के असमय निधन पर उनके परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की पात्रता आयु सीमा को 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दिया गया है।


400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट: प्रदेश के 400 राज्य विधि अधिकारियों को कार्य कुशलता बढ़ाने के लिए टैबलेट दिए जाएंगे, साथ ही उनकी फीस में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है।


चैम्बर सुविधाओं में शासन का सहयोग: 10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के चैम्बर में फर्नीचर और आवश्यक उपकरणों के लिए जो भी प्रस्ताव आएगा, उसमें प्रदेश सरकार पूरा सहयोग करेगी।

मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंदी दिवस के साथ हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का भी अवसर है। उन्होंने आस्था की इस भूमि से प्रदेशवासियों को हिंदी दिवस, हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी की हृदय से बधाई और शुभकामनाएं दीं।


स्वाधीनता आंदोलन से राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ता समाज की अहम भूमिका


    मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह समाज की राय बनाने के साथ उसके विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है। स्वाधीनता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, स्वतंत्र भारत में शासन-प्रशासन के संचालन, लोकतंत्र के सभी स्तंभों को मजबूती देने और राष्ट्र निर्माण के वर्तमान अभियान तक अधिवक्ता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन लंबे समय तक बिखरा रहा। दक्षिण अफ्रीका से अपनी वकालत छोड़कर महात्मा गांधी के आंदोलन की कमान संभालने के बाद इसे नई दिशा और गति मिली। प्रयागराज की धरती भी ऐसे अनेक अधिवक्ताओं की गवाह रही है, जिन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रैक्टिस के साथ स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पंडित मोतीलाल नेहरू और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे अधिवक्ताओं ने लंबे समय तक देश और स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी तथा क्रांतिकारियों के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी देश की आजादी के आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयागराज से जुड़े जीवन का उल्लेख करते हुए मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि संगम तट पर स्थित प्रेसिडेंशियल सूट भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष और देश के प्रथम राष्ट्रपति की याद दिलाता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रत्येक कुंभ के दौरान प्रयागराज आते थे और माघ मेले में कल्पवास करते थे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार और प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वयं सोमनाथ पहुंचे थे। राष्ट्र के प्रति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के योगदान और संविधान निर्माण से लेकर स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में उनकी भूमिका के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित करने का निर्णय लिया।


      मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लोकतंत्र के तीनों प्रमुख स्तंभ अपनी-अपनी व्यवस्था के तहत काम करते हैं, लेकिन उनके बीच बेहतर समन्वय और संवाद लोकतंत्र को अधिक परिपक्व और मजबूत बनाता है। न्यायपालिका भी विधि के शासन और सुशासन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि न्याय के रथ के बार और बेंच दो महत्वपूर्ण पहिए हैं। दोनों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय हमेशा बना रहना चाहिए।


    मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की बैठकों में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याओं को भी समान महत्व दिया जाता है। मुख्य न्यायाधीश, न्यायपालिका के संरक्षक के रूप में, अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दों को भी शासन के सामने प्रभावी तरीके से रखते हैं और उनके समाधान का रास्ता निकालने का प्रयास होता है।

बार-बेंच के बीच सम्मान, संवाद और समन्वय जरूरी

      मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि न्याय प्रशासन के लिए बार और बेंच के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी 2017 से पहले की स्थिति की ओर ध्यान दिलाया। उस समय चुनौती केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि व्यवस्था के दृष्टिकोण, प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही, कानून-व्यवस्था तथा न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भी थी। न्याय व्यवस्था की पहली कड़ी पुलिस है। मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के 56 जनपदों में सबसे ऊंची इमारतों में पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर, पुलिस बैरक या प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। उन्होंने लखनऊ में 2017 में किए गए पुलिस बैरक के अचानक निरीक्षण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि वहां दो पुलिसकर्मी रह रहे थे और छत टूटी होने के साथ जाले लगे थे। मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों से दिन-रात, सर्दी-गर्मी और बरसात में रक्षक की भूमिका निभाने की अपेक्षा है, उन्हें बुनियादी सुविधाएं देना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

      मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों की स्थिति भी बेहद खराब थी। कई अदालतें अस्थायी और किराए के भवनों में संचालित होती थीं। सरकार ने प्रभावी विटनेस प्रोटेक्शन की व्यवस्था मजबूत की है। पहले गवाहों के डर के कारण मुकर जाने से गंभीर आपराधिक मामलों में सजा दिलाना चुनौती बन जाता था। अपराधियों को जेल से अदालत लाने के लिए पुराने और असुरक्षित वाहनों की जगह व्यवस्था को सुरक्षित बनाया गया है।

      मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बेहतर समन्वय से व्यवस्था में रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्मेशन के परिणाम सामने आ रहे हैं। सुदृढ़ न्यायपालिका सुशासन की आधारशिला को मजबूत करती है और सुशासन चुनी हुई सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पुलिस-प्रॉसिक्यूशन कोऑर्डिनेशन से कन्विक्शन रेट में सुधार हुआ है। अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़कर समय पर चार्जशीट दाखिल करने और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखने की व्यवस्था की गई है। जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया है। न्याय श्रुति प्रणाली के माध्यम से अदालतों में गवाही वर्चुअल दर्ज कराने की शुरुआत हुई है। अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन में भी तेजी लाई गई है।

     मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 10 जनपदों में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसके लिए मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली के प्रयासों की सराहना की। इन परिसरों में एक ही छत के नीचे सभी न्यायिक कार्यों के साथ न्यायिक अधिकारियों के आवास, अधिवक्ताओं के चेंबर, स्पोर्ट्स और इंडोर स्टेडियम तथा अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने बताया कि त्वरित न्याय के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था को बढ़ाया गया है।


700 करोड़ से बने अधिवक्ता चेंबर

      मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रयागराज में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए एडवोकेट चेंबर बनाए जा चुके हैं। इसके साथ मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। जनपदीय स्तर पर भी एडवोकेट चेंबर के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है। कौशांबी, लखनऊ, कासगंज, श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जनपदों में अधिवक्ताओं के चेंबर बनाए जा चुके हैं या निर्माणाधीन हैं।


न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास

       मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में तीन नए कानून लागू हुए हैं। इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिवक्ताओं को बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण की चुनौती थी, लेकिन बार ने जिस तेजी से नए कानूनों को अपनाया, वह सराहनीय है। मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है। न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका तभी लोकतंत्र की कसौटी पर खरी उतरती हैं, जब नागरिकों का विश्वास कायम रहे। इसके लिए समय पर न्याय सबसे महत्वपूर्ण है। नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई, भेदभाव रहित व्यवहार और कानून की नजर में समानता का भरोसा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील और सशक्त न्याय व्यवस्था के लिए पारदर्शिता, निर्णयों में सत्यनिष्ठा, संस्थाओं में जवाबदेही और नागरिकों का विश्वास जरूरी है। बदलते दौर में कानून के सामने साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसी नई चुनौतियां और संभावनाएं सामने हैं। अधिवक्ताओं को टेक्नोलॉजी, बदलती अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे परिवर्तनों की गहरी समझ विकसित करनी होगी।


     मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं की है। युवा अधिवक्ता केवल सफल लीगल प्रोफेशनल बनने तक सीमित न रहें, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी और समाज के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी नागरिक बनें। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता की जिम्मेदारी केवल मुकदमे के परिणाम तक सीमित नहीं है। उसके प्रयास किसी व्यक्ति के विश्वास और जीवन की दिशा बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


चैम्बर में सुविधाओं के लिए सरकार देगी पूरा सहयोग’


      मा0 मुख्यमंत्री जी ने इस दौरान अधिवक्ता भवन की चाबी भी सौंपी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट परिसर में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए मल्टीलेवल पार्किंग और चैंबर बनाए गए हैं। चैंबर में फर्नीचर और आवश्यक उपकरणों जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए न्यायपालिका या बार एसोसिएशन के माध्यम से मुख्य न्यायमूर्ति की ओर से जो प्रस्ताव आएगा, राज्य सरकार उसमें हर प्रकार का सहयोग करेगी।


इस अवसर पर मा0 उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज की धरती पर आगमन पर मा0 मुख्यमंत्री जी का स्वागत करते हुए आज के दिन को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने सरकार की ओर से व अपनी ओर से अधिवक्ताओं को भवन की चाभी सौंपी गयी है, उसके लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद का गौरवशाली इतिहास पूरे देश की न्यायायिक परम्परा की अमूल धरोहर है, इस पर हमें गर्व है। मा0 उपमुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रयागराज का विशेष महत्व है। यहां एक ओर आस्था का संगम है और दूसरी ओर न्याय की गौरवशाली परम्परा है। यहां से निकला संदेश पूरे उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में जाता है। न्यायालय वह स्थान है, जहां सत्य की शक्ति होती है। यहां के अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका समय-समय पर निभाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि संविधान हमें अधिकार देता है और न्याय व्यवस्था उन अधिकारों की रक्षा का विश्वास दिलाती है। उन्होंने कहा कि सरकार कानून बनाती है और उस कानून का लाभ अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मा0 उपमुख्यमंत्री जी ने कहा कि न्याय व्यवस्था में हमारी प्राथमिकता यही होनी चाहिए कि गरीब हो या प्रभावशाली, कानून सबके लिए समान हो। मा0 प्रधानमंत्री जी के कुशलनेतृत्व में देश में इज ऑफ लिविंग के साथ इज आफ जस्टिस की दिशा में तकनीक डिजिटल व्यवस्था एवं आधुनिक न्यायिक इफ्रास्ट्रक्च्चर को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। मा0 प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में पुराने औपनिवेशिक आपराधिक कानूनों के स्थान पर नए न्याय केन्द्रित कानून लागू किए गए है, यह बदलते भारत न्याय व्यवस्था में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है। उन्होंने कहा कि मा0 प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विकसित भारत के संकल्प में तेज विकास के साथ तेज, सरल और सुलभ न्याय की भी व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका में है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की नीति साफ है कि निर्दोश को छेड़ेगे नहीं और अपराधी को छोडं़ेगे नहीं। मा0 उपमुख्यमंत्री जी ने कहा कि अधिवक्ता को सम्मान भी मिले, सुरक्षा भी मिले और कार्य करने के लिए आधुनिक सुविधाएं भी मिले, क्योंकि मजबूत बार और बेंच मिलकर मजबूत न्याय व्यवस्था का निर्माण करते है।


इस अवसर पर मा0 उच्च न्यायालय, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री राकेश पाण्डेय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से सभी स्वागत करते हुए कहा कि प्रयागराज की इस पावन धरती पर न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका के प्रतिनिधियों का एक मंच पर उपस्थित होना अपने आप में एक महत्वपूर्णक्षण है। उन्होंने कहा कि मा0 मुख्यमंत्री जी का अधिवक्ता समाज के प्रति स्नेह, सम्मान और संवेदनशीलता सदैव सराहनीय रही है। कहा कि मा0 मुख्यमंत्री जी आप हमारे लिए केवल प्रदेश के मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि हमारे संरक्षक व प्रेरणा स्त्रोत भी है। कहा कि मा0 मुख्यमंत्री जी के कर-कमलों से आज इस भवन की चाभी को सौंपे जाने का ऐतिहासिक क्षण हम सभी को देखने को मिला है। उन्होंने बार एसोसिएशन की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया।


इस अवसर पर मा0 इलाहाबाद उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मा0 मुख्य न्यायमूर्ति श्री अरूण भंसाली एवं वरिष्ठ मा0 न्यायमूर्ति श्री अरिदमन सिन्हा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।


  इस अवसर पर मा0 प्रभारी मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह, मा0 मंत्री श्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सभी मा0 न्यायूर्तिगण, महाधिवक्ता श्री अजय मिश्रा, अपर महाधिवक्तागण, बार एसोसिएशन के महासचिव श्री अखिलेश कुमार शर्मा, बार के सभी पदाधिकारीगण, मा0 सांसद फूलपुर श्री प्रवीण पटेल, मा0 महापौर श्री उमेश चंद्र गणेश केसरवानी, माननीय विधायक फूलपुर श्री दीपक पटेल, मा0 विधायक शहर उत्तर श्री हर्षवर्धन वाजपेयी, मा0 विधायक शहर पश्चिम श्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, मा0 विधायक फाफामऊ श्री गुरू प्रसाद मौर्य, मा0 विधायक करछना श्री पीयूष रंजन निषाद, मा0 विधायक कोरांव श्री राजमणि कोल, विधान परिषद सदस्य श्री सुरेंद्र चौधरी व अन्य मा0 जनप्रतिनिधिगण सहित भारी संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित रहे।

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