प्रदीप बच्चन (व्युरो चीफ)
बलिया (यूपी)। बलिया। भोजपुरी की प्रसिद्ध कहावत ‘देवकुर गईनी, दूना दुख मिलल’ इन दिनों बलिया जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनियर में पूरी तरह चरितार्थ होती दिख रही है। यहां अपनी पुरानी बीमारी का इलाज कराने पहुंचे एक मरीज को डॉक्टर से मिलने से पहले ही अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों के हमले का शिकार होना पड़ा, जिससे उसे एक नई मुसीबत का इलाज कराना पड़ा।
क्षेत्र पंचायत मनियर के अजऊर निवासी सूर्यदेव राजभर को दिखाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता हरिनारायण प्रजापति उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनियर लेकर पहुंचे थे। साथ आए लोगों को क्या पता था कि मरीज डॉक्टर के पास पहुंचने से पहले ही अस्पताल परिसर में घूम रहे आवारा कुत्तों की वजह से‘ओपीडी’ में पहुंच जाएगा।
बताया गया कि अस्पताल परिसर में मौजूद आवारा कुत्तों ने सूर्यदेव राजभर को काट लिया। इसके बाद इलाज कराने आए मरीज को कुत्ते के काटने का इलाज भी कराना पड़ा। हरिनारायण प्रजापति उन्हें अस्पताल में तैनात संविदा चिकित्सक के पास लेकर गए, जहां उनका उपचार किया गया।
मामले की जानकारी मिलने पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के राज्य कमेटी सदस्य वशिष्ठ राजभर भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में मौजूद चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों से आवारा कुत्तों को परिसर से हटाने की बात कही। इस पर बताया गया कि आवारा कुत्तों को हटाने की जिम्मेदारी अस्पताल की नहीं बल्कि नगर पंचायत की है।
अब सवाल यह है कि यदि अस्पताल परिसर में किसी मरीज को कुत्ता काट ले तो उसका इलाज अस्पताल करेगा और कुत्ते को अस्पताल से बाहर कौन करेगा? क्या इसके लिए भी बाकायदा नगर पंचायत को ‘रेफर’ किया जाएगा?
वशिष्ठ राजभर ने मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी बलिया अभय नारायण राय से की। उनके अनुसार सीएमओ ने आश्वासन दिया कि डॉग स्क्वायड बुलाकर आवारा कुत्तों को हटाने की व्यवस्था की जाएगी।
वशिष्ठ राजभर ने अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजे तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सक डॉ. दिग्विजय कुमार मौजूद नहीं थे। उन्होंने मांग की कि प्रभारी चिकित्सक के बैठने का बाकायदा समय निर्धारित किया जाए कि वे कितने बजे से कितने बजे तक अस्पताल में उपलब्ध रहेंगे। उनका कहना है कि गंभीर मरीजों के उपचार के लिए केवल संविदा पर तैनात होम्योपैथिक चिकित्सक की मौजूदगी पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशिक्षित एमबीबीएस चिकित्सक की नियमित उपस्थिति जरूरी है।
*50 से अधिक कर्मचारी, फिर भी कुत्तों के लिए ‘नगर पंचायत पर निर्भर’*
विडंबना यह है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब 50 से अधिक कर्मचारी कार्यरत बताए जाते हैं, लेकिन अस्पताल परिसर में घूम रहे आवारा कुत्तों को हटाने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि अस्पताल में सफाईकर्मी, चपरासी और अन्य कर्मचारी हैं तो क्या एक-दो आवारा कुत्तों को परिसर से बाहर करने के लिए भी नगर पंचायत की गाड़ी का इंतजार करना पड़ेगा?
क्या सार्वजनिक संस्थानों में मौजूद हर कुत्ते को हटाने की जिम्मेदारी नगर पंचायत की होगी? फिर अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी आखिर कहां से शुरू होती है और कहां खत्म?
‘*24 घंटे ड्यूटी’ से ‘कुत्ते की ड्यूटी’ तक पहुंचा सवाल*
गौरतलब है कि करीब एक माह पहले डॉ. शैलेंद्र सिंह रावत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनियर के प्रभारी थे। उनके बारे में बताया जाता है कि वे 24 घंटे ड्यूटी देते थे और रात में भी उनकी मौजूदगी रहती थी। बाद में महिला कर्मचारियों द्वारा लगाए गए कथित गंभीर आरोपों के बाद सीएमओ ने उनका स्थानांतरण कर दिया और पहले से विवादों में रहे डॉ. दिग्विजय कुमार को पुनः प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई।
वहीं, विगत 4 अगस्त को डॉ. दिग्विजय कुमार ने मीडिया को बयान देकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनियर की व्यवस्था सुधारने, चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और किसी प्रकार की कमी न रहने की बात कही थी।
लेकिन सवाल अब यह है कि व्यवस्था सुधारने की मुहिम में मरीजों को पहले डॉक्टर मिलेंगे या कुत्ते?
इलाज कराने आए मरीज को यदि अस्पताल परिसर में ही कुत्ता काट ले तो यह केवल आवारा पशुओं की समस्या नहीं, बल्कि अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था और जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़ा करता है। मरीज अस्पताल इलाज के लिए आता है, ‘नया रोग’ लेकर लौटने के लिए नहीं।
अब देखना यह है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनियर में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति, आवारा कुत्तों से निजात और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था कब तक कागज और बयानों से निकलकर जमीन पर दिखाई देती है।
CMO ने दिया आश्वासन, व्यवस्था पर उठे सवाल
मामले को लेकर वशिष्ठ राजभर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) बलिया, अभय नारायण राय से शिकायत की। वशिष्ठ राजभर के मुताबिक, सीएमओ ने आश्वासन दिया है कि डॉग स्क्वायड बुलाकर कुत्तों को परिसर से हटवाया जाएगा।
इसके साथ ही वशिष्ठ राजभर ने स्वास्थ्य केंद्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए:
प्रभारी की अनुपस्थिति: सुबह 11 बजे तक पीएचसी प्रभारी डॉ. दिग्विजय कुमार अस्पताल में मौजूद नहीं थे।
समय निर्धारण की मांग: मांग की गई कि प्रभारी चिकित्सक के बैठने की समय-सारणी स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाए।
MBBS डॉक्टर की जरूरत: गंभीर मरीजों के इलाज के लिए केवल संविदा पर कार्यरत होम्योपैथिक डॉक्टर की मौजूदगी को नाकाफी बताते हुए नियमित एमबीबीएस डॉक्टर की उपस्थिति की मांग की गई।
50 से अधिक कर्मचारी, फिर भी नगर पंचायत पर निर्भरता
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब 50 से अधिक कर्मचारी तैनात बताए जाते हैं। इसके बावजूद परिसर से एक-दो आवारा कुत्तों को बाहर करने के लिए अस्पताल प्रशासन को नगर पंचायत की गाड़ी का इंतजार करना पड़ रहा है। सफाईकर्मियों और चपरासियों की मौजूदगी के बाद भी इस तरह की लापरवाही अस्पताल प्रबंधन पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है।

