बलिया के बड़ागांव में निजी मकान में मिलीं 66 बाढ़ राहत किट, हड़कंप; आरोपी लेखपाल पर निलंबन और FIR की कार्रवाई तय
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बलिया के बड़ागांव में निजी मकान में मिलीं 66 बाढ़ राहत किट, हड़कंप; आरोपी लेखपाल पर निलंबन और FIR की कार्रवाई तय

 


प्रदीप बच्चन (व्युरो चीफ) 

बलिया (मनियर)। गैर-बाढ़ प्रभावित क्षेत्र बड़ागांव स्थित एक निजी मकान के कमरे में भारी मात्रा में बाढ़ राहत सामग्री मिलने से हड़कंप मच गया। दो पिकअप वाहनों से लाई गई 66 राहत किटों को निजी कटरे में रखे जाने पर ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया और धांधली की आशंका जताई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली मच गई।


मौके पर तहसीलदार सदर अभिषेक कुमार, उपजिलाधिकारी बांसडीह पीयूष कुमार मिश्रा, तहसीलदार बांसडीह नितिन सिंह, क्षेत्राधिकारी बांसडीह जयशंकर मिश्रा, थाना प्रभारी मनियर अजय कुमार त्रिपाठी सहित संबंधित लेखपाल मौजूद रहे। ग्राम प्रधान संजय राजभर, दीपू सिंह, छात्र नेता रोहित सिंह माही, बैजू राम, छीतेश्वर राम सहित कई ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे।


ग्रामीणों का आरोप था कि दो पिकअप वाहनों से बाढ़ राहत सामग्री लाकर बड़ागांव स्थित एक निजी मकान में रखी गई है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि बड़ागांव बाढ़ प्रभावित क्षेत्र नहीं है तो राहत सामग्री यहां किस उद्देश्य से लाई गई। ग्रामीणों का यह भी आरोप था कि सामग्री दूबहड़ थाना क्षेत्र के चैन छपरा में वितरण के लिए भेजी जानी थी, लेकिन उसे यहां लाकर रखा गया।


वहीं मौके पर मौजूद अधिकारियों की ओर से बताया गया कि विश्वकर्मा जयंती के कारण वाहनों को खाली कराने के उद्देश्य से राहत सामग्री को अस्थायी रूप से वहां रखा गया था। हालांकि, इस स्पष्टीकरण से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हुए और काफी देर तक मौके पर गहमागहमी की स्थिति बनी रही।

घटनाक्रम और प्रशासनिक जांच

सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी बलिया सदर गोपनेश तिवारी, उपजिलाधिकारी बांसडीह पीयूष कुमार मिश्रा, तहसीलदार सदर अभिषेक कुमार, तहसीलदार बांसडीह नितिन सिंह, सीओ जयशंकर मिश्रा और मनियर थाना प्रभारी अजय कुमार त्रिपाठी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।

निजी कटरे में भंडारण: ग्रामीणों के अनुसार राहत सामग्री दो कमरों में रखी गई थी, जबकि एक तीसरा कमरा बंद मिला जिसे खोला नहीं जा सका।


विश्वकर्मा जयंती का तर्क खारिज: अधिकारियों ने बताया कि विश्वकर्मा जयंती के कारण वाहनों को खाली कराने के उद्देश्य से सामग्री को अस्थायी रूप से रखा गया था, लेकिन इस स्पष्टीकरण से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हुए।


निजी सर्वेयर की संलिप्तता: जांच के दौरान बंसवरिया निवासी एक प्राइवेट सर्वेयर द्वारा राहत किट रखवाने की बात सामने आई।

बाद में उपजिलाधिकारी बलिया सदर गोपनेश तिवारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की मौजूदगी में रेपूरा के लेखपाल शिव वर्मा से मामले के संबंध में पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार लेखपाल के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर उसके विरुद्ध निलंबन एवं प्राथमिकी की कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। इस बात की चर्चा रही। निवासी बंसवरिया का एक व्यक्ति एग्रीटेक में प्राइवेट सर्वेयर है उसके द्वारा बाढ़ राहत किट एक निजी मकान में रखवाया गया था।

इसके बाद भी ग्रामीणों ने राहत सामग्री को मौके से ले जाने का विरोध किया और विधायक केतकी सिंह के मौके पर पहुंचने तक सामग्री नहीं हटाने की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। प्रशासन की ओर से दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद मामला शांत हुआ और राहत सामग्री के पैकेट पिकअप वाहनों पर लादकर वहां से ले जाए गए।


ग्रामीणों के अनुसार राहत सामग्री दो कमरों में रखी गई थी। एक तीसरे कमरे को भी खोलने का प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं खुल सका। इस पूरे मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि राहत सामग्री वहां किस उद्देश्य और किन परिस्थितियों में रखी गई थी।


उपजिलाधिकारी बलिया सदर गोपनेश तिवारी ने बताया कि मौके से 66 राहत किट मिली हैं। इन किटों का वितरण बाढ़ पीड़ितों के बीच किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और इसमें जो भी व्यक्ति संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


वहीं ग्रामीणों और छात्र नेता रोहित सिंह माही ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर मामले में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो वे धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।


ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। मामले में प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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