यह संदेश सोशल मीडिया (जैसे व्हाट्सएप और फेसबुक) पर तेजी से फॉरवर्ड किया जाने वाला एक भ्रामक और नफरत फैलाने वाला दावा (Fake News/Hatred Narrative) है। पत्रकारिता के मानकों के अनुसार, बिना किसी पुष्टि या स्रोत के इस प्रकार के फर्जी संदेशों को समाचार के रूप में प्रकाशित नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया वायरल मैसेज का सच
अपुष्ट कहानी: इस संदेश में गाजियाबाद के किसी कथित व्यापारी के साथ हुई बातचीत का कोई वास्तविक स्रोत, नाम या प्रमाण उपलब्ध नहीं है। यह समाज में ध्रुवीकरण और नफरत बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया एक काल्पनिक विवरण प्रतीत होता है।
ऐतिहासिक और सामाजिक तथ्यों को तोड़ना-मरोड़ना: संदेश में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और ऐतिहासिक घटनाओं को भड़काऊ भाषा में पेश किया गया है ताकि सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सके।
फेक न्यूज से सतर्कता जरूरी: जिम्मेदार नागरिक और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसे किसी भी असत्यापित कंटेंट को बढ़ावा नहीं देते, जो समुदायों के बीच कटुता फैलाए।
*एक मुस्लिम व्यापारी का बयान*
*आज मेरी बात राजनगर (गाज़ियाबाद) सैक्टर 10 की मार्किट में एक* *मुस्लिम व्यापारी*( *फल विक्रेता) से उसी* *के दुकान पर हुई । मैंने उससे समुदाय विशेष स्तर पर अपने दुकानों पर अपना नाम व जाति लिखने के आदेश का कोई विरोध न करने का कारण जानना चाहा। उसका जबाब सुनकर मैं बहुत अशांत हो गया और मेरे दिमाग़ की सारी बत्तियां जल गई।*
उसने मुझे बताया कि लाला जी क्या फर्क पड़ता है नाम लिखने से। हिंदू और सिख तो हमेशा से ही उन लोगो का साथ देते हैं जो उनके खिलाफ लड़ने के लिए उत्सुक रहते हैं।
अब हमारे ख्वाजा मोइद्दीन चिश्ती साहब को ही ले लो, उन्होंने पृथ्वीराज की बेटियों का सरेआम बलात्कार कराया और आज हिंदू उनकी मजार को चूमने को ही लालायित रहते हैं
अभी राममंदिर प्रकरण को ही लें, यदि तुम्हारे हिन्दू ही राममंदिर के विरोध में खड़े नही होते तो क्या किसी मुस्लिम की हिम्मत थी जो बाबरी मस्जिद के पक्ष में खड़ा हो जाता ।
हमारे पूर्वजों ने सिखों के गुरु गोविंद सिंह जी का सरेआम कत्ल किया, उनके बच्चों को दीवार में चुनवा दिया और आज उनकी पुश्तें हमारे तलवे चाटने को तैयार बैठी हैं ।
आपने देखा नही कैसे वो लोग अपने गुरुद्वारों में हमे नमाज अदा करवा रहे हैं । रोजा इफ्तारी करा रहे हैं।
लाला जी तुम्हारे लोग बहुत भुलक्कड़ व लालची हैं । सन चौरासी के दंगों में कांग्रेस ने सिखों का कत्लेआम करवाया और आज सिख कांग्रेस के साथ साथ मुसलमानों के तलवे चाटने को ललायित रहते हैं ।
मुलायम सिंह ने हिंदुओं पर गोलियां चलवाई और आज हिंदू उसके बेटे श्री अखिलेश यादव की चरण वंदना करने को ललायित हैं, उसके लिए दरियां बिछा रहे हैं ।
इसलिए लाला जी कोई फर्क नहीं पड़ता । अगर हमारी दुकान पर मुसलमान का नेम प्लेट भी लगी हो और हिंदू को वही आम किसी मुस्लिम दुकानदार की दुकान पर ₹5 सस्ता मिल रहा है तो वह मुसलमान से ही खरीदेगा।
आप ही के भाई, आपके हिन्दू धर्म का हिस्सा एस.सी., एस.टी. व दलित समाज के लोग जय मीम ,जय भीम में इतना खो गए हैं कि उन्हें अपने बहन बेटियों के लव-जिहाद और मुसलमानों द्वारा बलात्कार से भी कोई फर्क नहीं पड़ता । और, आप पड़े हो नाम के चक्कर में।
हिंदू को ₹ 5 प्रति किलो अगर सब्जी सस्ती मिले तो वो किसने थूका है किसने मूता है, सब भूल जाएंगे,सामान हमसे ही खरीदेंगे।
मैं उसकी बात सुन सन्न रह गया और ये सोचते हुए कि हिन्दुओ की बर्बादी का वास्तविक जिम्मेदार खुद हिन्दू है या मुसलमान सोचते हुए घर वापस आ गया।
यह सच्चाई लगी हो तो सब हिन्दू और सिख भाई बहन इसे अपने सभी ग्रुपों में भेजे
