प्रयागराज। मण्डलायुक्त के निर्देशानुसार 17 अगस्त 2026 को तहसील करछना में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में अपर आयुक्त (प्रशासन) ने जनसमस्याओं की सुनवाई की। इस दौरान व्यवस्थाओं में लापरवाही और अनियमितता पाए जाने पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए सुधार के सख्त निर्देश दिए गए।
उपस्थिति पंजिका में अनियमितता पर कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान उपस्थिति पंजिका सही न पाए जाने पर अपर आयुक्त ने सुव्यवस्थित पंजिका तैयार करने के आदेश दिए, जिसमें अधिकारी का नाम, पदनाम, हस्ताक्षर और आगमन समय स्पष्ट दर्ज हो। बिना पूर्व अनुमति अनुपस्थित अधिकारियों का वेतन तब तक रोकने के निर्देश दिए गए जब तक वे संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत न कर दें और जिलाधिकारी की अनुमति न मिल जाए।
शिकायतकर्ताओं के लिए बैठने और रिसीविंग की समुचित व्यवस्था
शिकायतों को रजिस्टर में दर्ज न करने और प्राप्तियों (रिसीविंग) का आदान-प्रदान न होने पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया गया कि हर प्रार्थनापत्र को रजिस्टर में दर्ज कर शिकायतकर्ता को हस्ताक्षरयुक्त प्राप्ति दी जाए। साथ ही सभागार में शिकायतकर्ताओं के बैठने और क्रमवार सुनवाई की बेहतर व्यवस्था बनाने को कहा गया।
निस्तारण के मुख्य बिंदु:
- प्राप्त आवेदन: कुल 154 प्रार्थनापत्र (राजस्व: 130, पुलिस: 05, विकास: 06, विद्युत: 02, अन्य: 11)
- मौके पर निस्तारण: 08 प्रकरणों का तत्काल समाधान
- समय-सीमा: शेष शिकायतों का 1 सप्ताह और विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 15 दिनों के भीतर निस्तारण
- पुष्टि: समाधान के बाद शिकायतकर्ताओं से फोन पर वार्ता कर निस्तारण की संतुष्टि की पुष्टि अनिवार्य
गंभीर मामलों और अवैध कब्जे पर कड़े रुख
13 अत्यंत गंभीर मामलों की जांच उप जिलाधिकारी (SDM) को स्वयं एक सप्ताह में पूरी कर कार्रवाई रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। ग्रामसभा या सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे की जांच भी केवल SDM या तहसीलदार स्तर के अधिकारी करेंगे; विशेष परिस्थिति में नायब तहसीलदार से जांच कराई जा सकती है, पर इससे निचले स्तर के कर्मचारी को यह जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। निस्तारण में असंतोष पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

