लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना का लाभ हर पात्र किसान तक पहुँचाने के लिए एक बड़े अभियान की रूपरेखा तैयार की है। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने आज विधान भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास खंड (ब्लॉक) स्तर पर विशेष शिविर लगाकर शेष किसानों को जल्द से जल्द केसीसी उपलब्ध कराया जाए।
कृषि मंत्री की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई इस समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना और केसीसी योजना की प्रगति का जायजा लिया गया।
बैठक के प्रमुख बिंदु:
ब्लॉक स्तर पर लगेंगे विशेष शिविर: बैंक, बीमा कंपनियां और कृषि विभाग आपस में बेहतर तालमेल बिठाकर विकास खंड स्तर पर अभियान और शिविर आयोजित करेंगे ताकि 'ऑप्ट आउट' करने वाले किसानों को छोड़कर सभी केसीसी धारक किसानों को फसल बीमा से जोड़ा जा सके।
2026-27 का लक्ष्य जल्द पूरा करने की हिदायत: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तय 83.90 लाख केसीसी के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक केवल 28.43 लाख केसीसी ही बनाए या नवीनीकृत किए जा सके हैं। कृषि मंत्री ने इस धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
प्रीमियम और क्षतिपूर्ति में पारदर्शिता: बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसानों के खाते से प्रीमियम राशि कटने के दो दिनों के भीतर उसे बीमा कंपनियों को भेजा जाए। साथ ही, प्रतिकूल मौसम में फसल नुकसान का त्वरित आकलन कर समयबद्ध तरीके से क्षतिपूर्ति भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया।
वित्तीय और बीमा आंकड़े: प्रदेश के कुल 1.10 करोड़ केसीसी धारकों में से वर्तमान में 17.07 लाख किसान बीमित हैं, 39.00 लाख खाते अपात्र श्रेणी में हैं तथा 56.31 लाख खातों को संतृप्त किया जाना बाकी है। खरीफ 2025 में 7.26 लाख किसानों को 806.98 करोड़ रुपये और रबी 2025-26 में 1.66 लाख किसानों को 134.12 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जा चुका है।
बैठक में कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, प्रमुख सचिव कृषि रवीन्द्र, नाबार्ड, व्यावसायिक व ग्रामीण बैंकों और बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

