मनियर पीएचसी विवाद का पटाक्षेप: डॉक्टर शैलेंद्र सिंह रावत का तबादला, डॉ. दिग्विजय कुमार को मिला प्रभारी का जिम्मा
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मनियर पीएचसी विवाद का पटाक्षेप: डॉक्टर शैलेंद्र सिंह रावत का तबादला, डॉ. दिग्विजय कुमार को मिला प्रभारी का जिम्मा

 


प्रदीप बच्चन (व्युरो चीफ) 

बलिया (यूपी)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनियर पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सिंह रावत और महिला स्वास्थ्य कर्मियों के बीच करीब एक सप्ताह से चल रहे विवाद का फिलहाल पटाक्षेप हो गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभय नारायण राय के आदेश पर डॉ. शैलेंद्र सिंह रावत का स्थानांतरण कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि पिछले करीब एक सप्ताह से महिला स्वास्थ्य कर्मी प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. शैलेंद्र सिंह रावत पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग कर रही थीं। महिला स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से अटेंडेंस काटने, मरीजों को बाहर की दवा लिखने, महिला कर्मियों को कमरे में बुलाने और बैड टच जैसे आरोप लगाए गए थे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

महिला स्वास्थ्य कर्मियों ने चेतावनी दी थी कि यदि सोमवार तक डॉ. रावत को प्रभारी पद से नहीं हटाया गया तो वे कार्य बहिष्कार करेंगी। रविवार को बड़ा गांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर हुई बैठक में भी इस संबंध में निर्णय लिए जाने की बात सामने आई थी।


*स्वयं के अनुरोध पर सोनवानी भेजे गए डॉ. रावत*


विवाद को शांत करने के उद्देश्य से सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय ने डॉ. शैलेंद्र सिंह रावत, बाल रोग विशेषज्ञ एवं प्रभारी चिकित्सा अधिकारी मनियर, को उनके स्वयं के अनुरोध पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनवानी, बलिया में रिक्त बाल रोग विशेषज्ञ के पद पर स्थानांतरित कर दिया है।

आदेश में उन्हें तत्काल प्रभाव से पीएचसी मनियर का कार्यभार छोड़कर नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने तथा प्रभार प्रमाण पत्र संबंधित अधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

*डॉ. दिग्विजय कुमार को मिला मनियर का अतिरिक्त प्रभार*


वहीं, सीएमओ ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर के अधीक्षक डॉ. दिग्विजय कुमार को अपने वर्तमान कार्य के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनियर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों का दायित्व अग्रिम आदेश तक सौंपा है।

डॉ. दिग्विजय कुमार को तत्काल प्रभारी चिकित्सा अधिकारी मनियर का पदभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।


*पुराना है डॉ. दिग्विजय कुमार से जुड़ा विवाद*


स्थानीय लोगों के अनुसार डॉ. दिग्विजय कुमार करीब दो वर्ष पूर्व भी मनियर के चिकित्सा प्रभारी रह चुके हैं और उस समय उनकी तैनाती सिकंदरपुर में भी थी। उस दौरान उनकी मनियर में उपस्थिति को लेकर सवाल उठते रहे थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि उस समय किसी घटना या दुर्घटना के बाद पीएचसी मनियर पर विरोध होने पर उनकी उपस्थिति सिकंदरपुर में और सिकंदरपुर में विरोध होने पर मनियर में दर्शाए जाने की बातें सामने आती थीं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।


स्थानीय लोगों के मुताबिक विधायक केतकी सिंह ने भी उनकी कार्यप्रणाली को लेकर अधिकारियों से शिकायत की थी। बाद में धरना-प्रदर्शन और तत्कालीन मंत्री दयाशंकर सिंह के प्रयासों के बाद उनका स्थानांतरण हुआ था।


*अब स्थानीय लोगों को सता रही नई चिंता*


इधर, डॉ. शैलेंद्र सिंह रावत के स्थानांतरण के बाद स्थानीय लोगों में एक नई चिंता पैदा हो गई है। लोगों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मनियर को स्थायी चिकित्सक की जरूरत है, न कि किसी दूसरे अस्पताल के चिकित्सक को अतिरिक्त प्रभार देने की।

स्थानीय लोगों के अनुसार कोरोना काल के दौरान पीएचसी मनियर के प्रभारी रहे डॉ. सहाबुद्दीन अस्पताल में स्थायी रूप से मौजूद रहते थे। उनके स्थानांतरण के बाद लंबे समय तक ऐसी स्थिति रही कि यहां तैनात डॉक्टर रात में अस्पताल में रुकने को तैयार नहीं हुए। लोगों का कहना है कि पिछले करीब एक वर्ष में डॉ. शैलेंद्र सिंह रावत ही ऐसे चिकित्सक रहे जो रात में भी मनियर में उपलब्ध रहते थे।

अब लोगों को आशंका है कि यदि पीएचसी मनियर पर स्थायी डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई तो यह अस्पताल धीरे-धीरे सिर्फ रेफरल सेंटर बनकर रह जाएगा।

स्थानीय लोगों की मांग है कि मनियर पीएचसी की व्यवस्था किसी अन्य अस्पताल के चिकित्सक को अतिरिक्त प्रभार देने के बजाय एक स्थायी प्रभारी चिकित्साधिकारी की तैनाती की जाए, ताकि क्षेत्र के मरीजों को रात-दिन चिकित्सा सुविधा मिल सके।

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