ब्यूरो रिपोर्ट (शिव शरण), गोंडा:
गोंडा में पिछले 27 सालों से लंबित एक भूमि विवाद मामले में सिविल जज शबीना खान को कथित रूप से फोन कर दबाव बनाने के मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने देवीपाटन मंडल की मंडलायुक्त (आईएएस) दुर्गा शक्ति नागपाल के इस कदम को प्रथमदृष्टया न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप माना है।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 1997 का विवाद: यह मामला नगर पालिका परिषद गोंडा के खिलाफ ज्योति विद्या मंदिर स्कूल से जुड़ी नजूल भूमि का है, जो पिछले तीन दशकों (1997) से सिविल कोर्ट में लंबित है।
दबाव का आरोप: स्कूल की ओर से आरोप लगाया गया था कि राज्य के वरिष्ठ अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर अदालत पर दबाव बना रहे हैं, जिसके आधार पर केस को गोंडा से बाहर स्थानांतरित करने की याचिका दाखिल की गई थी।
15 जुलाई की कॉल: विवाद तब और बढ़ गया जब सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान ने 15 जुलाई को मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के साथ हुई फोन बातचीत की जानकारी दी। इस कॉल में जज की छुट्टी के साथ-साथ कोर्ट में लंबित इस केस का जिक्र भी किया गया था।
अदालत का फैसला और अगली कार्रवाई
न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस प्रकार न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त कर इस मामले को अवमानना की कार्रवाई के लिए उपयुक्त पीठ के समक्ष रखा जाए।
फिलहाल, सिविल जज के आग्रह पर जिला जज ने यह मुकदमा गोंडा की ही दूसरी अदालत में ट्रांसफर कर दिया है।

