संस्कृत ज्ञान से सहज प्राप्त होती है भारतीय विरासत: पार्थ सारथी सेन शर्मा
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संस्कृत ज्ञान से सहज प्राप्त होती है भारतीय विरासत: पार्थ सारथी सेन शर्मा

 

प्रयागराज / लखनऊ, 31 अगस्त 2026।

माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में जिला पंचायत भवन सभागार, प्रयागराज में आयोजित राज्यस्तरीय संस्कृत सप्ताह समापन समारोह-2026 गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, संस्कृत के विद्वानों, शिक्षकों तथा संस्कृत प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।


समारोह के मुख्य अतिथि अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि संस्कृत के ज्ञान से हमें अपने देश की समृद्ध विरासत सहज ही प्राप्त हो जाती है। आज विश्व के अनेक प्रख्यात विश्वविद्यालयों में संस्कृत के अध्ययन एवं शोध का कार्य हो रहा है, ऐसे में भारत में भी संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रसार के लिए विशिष्ट प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. गिरीशचंद्र त्रिपाठी, पूर्व कुलपति, बीएचयू वाराणसी ने कहा कि भारत केवल एक भू-खंड नहीं, बल्कि आचार, दर्शन और जीवन के उत्कृष्ट आयामों की भूमि है। भारत की इस विशिष्ट दृष्टि और जीवन-दर्शन को समझने का मार्ग संस्कृत से होकर जाता है।


विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त आईएएस एस.के. पाण्डेय ने कहा कि संस्कृत के क्षेत्र में रोजगार के नवीन अवसर सृजित कर इसके अध्ययन एवं संवर्धन को और गति दी जा सकती है। विशेष अतिथि सचिव, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद भगवती सिंह ने कहा कि किसी भी भाषा का वास्तविक संवर्धन उसके अध्ययन-अध्यापन की उत्कृष्टता से ही सम्भव है।


कार्यक्रम में उप शिक्षा निदेशक (संस्कृत) डॉ. ब्रजेश मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि सचिव, उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद श्री ओम प्रकाश त्रिपाठी ने तकनीक एवं एआई के युग में संस्कृत को संस्कार का आधार बताया। आयोजन में प्रधान निरीक्षक, संस्कृत पाठशालाएं श्री पवन कुमार श्रीवास्तव का विशेष योगदान रहा।


समारोह में प्रो. सुरेन्द्र पाल सिंह, अरविन्द शास्त्री, डॉ. विनोद कुमार मिश्र, डॉ. सालिकराम त्रिपाठी, डॉ. अरुणेश मिश्र, श्री यशवन्त कुमार द्विवेदी, डॉ. राजेश मिश्र ‘धीर’, डॉ. मुकेश त्रिपाठी सहित अनेक विद्वानों एवं शिक्षकों को सम्मानित किया गया।


संस्कृत प्रतियोगिताओं में गीता पाठ में संस्कार को प्रथम एवं आयुष को द्वितीय, गीत प्रतियोगिता में उत्सव त्रिपाठी को प्रथम एवं ओम तिवारी को द्वितीय तथा अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता में अनमोल को प्रथम एवं विवेकानंद को द्वितीय स्थान का पुरस्कार प्रदान किया गया।

समारोह के प्रमुख बिंदु:


मुख्य अतिथि का संबोधन: अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि संस्कृत के ज्ञान से देश की समृद्ध विरासत सहजता से प्राप्त हो जाती है। उन्होंने दुनिया भर के प्रमुख विश्वविद्यालयों में संस्कृत पर हो रहे शोध का हवाला देते हुए भारत में भी इसके व्यापक प्रसार और संरक्षण पर बल दिया।


भारतीय दर्शन का आधार: कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीशचंद्र त्रिपाठी ने कहा कि भारत की विशिष्ट दृष्टि और जीवन-दर्शन को समझने का सीधा मार्ग संस्कृत से होकर गुजरता है।


रोजगार और गुणवत्ता पर जोर: सेवानिवृत्त आईएएस एस.के. पाण्डेय ने संस्कृत क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने की आवश्यकता जताई, वहीं माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने कहा कि भाषा का सच्चा संवर्धन उत्कृष्ट अध्ययन-अध्यापन से ही संभव है।


तकनीक के दौर में संस्कार: उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव ओम प्रकाश त्रिपाठी ने तकनीक और एआई (AI) के युग में संस्कृत को संस्कारों का मुख्य आधार बताया।

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