प्रदीप बच्चन (ब्यूरो चीफ)
बलिया (यूपी) प्रत्येक वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा पृथ्वी को स्वच्छ, सुरक्षित और हरा-भरा बनाने के लिए प्रेरित करना है। पत्रकार सैयद सेराज अहमद ने जानकारी देते हुए हमारे वरिष्ठ संवाददाता प्रदीप बच्चन को बताया कि पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है। स्वच्छ वायु, शुद्ध जल, उपजाऊ भूमि और जैव विविधता के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।
विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद की गई थी। पहली बार इसे 1973 में मनाया गया। तब से यह दिन दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए जन-जागरूकता का सबसे बड़ा वैश्विक अभियान बन चुका है।
आज पर्यावरण अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। बढ़ता प्रदूषण, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, प्लास्टिक कचरा और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन पृथ्वी के संतुलन को बिगाड़ रहे हैं। इन समस्याओं का प्रभाव मानव स्वास्थ्य, कृषि, जल स्रोतों और वन्य जीवों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। हमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए, प्लास्टिक का उपयोग कम करना चाहिए, जल एवं ऊर्जा की बचत करनी चाहिए तथा स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।
विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय समुदायों को पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाने चाहिए। युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि आज हम प्रकृति की रक्षा करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा।
विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि पृथ्वी केवल हमारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है। इसलिए हमें पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेकर प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीना चाहिए। यही मानवता और विकास का सही मार्ग है।
"पेड़ लगाएं, पर्यावरण बचाएं; स्वच्छ पृथ्वी, स्वस्थ जीवन अपनाएं।
