प्रयागराज: सदियों से मनुष्य को तारने वालीं और मोक्ष प्रदान करने वाली माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का महापर्व यानी गंगा दशहरा इस वर्ष बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है। चहुंओर इसे लेकर उल्लास और उमंग का माहौल है। देश के विभिन्न गंगा घाटों पर संगीतमयी आरती और भजन-कीर्तन के माध्यम से मोक्षदायिनी की महिमा का गुणगान किया जा रहा है। इस पावन और भक्तिमय माहौल में श्रद्धालु माँ गंगा की निर्मलता और स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प भी ले रहे हैं। सनातन धर्मावलंबी इस महापर्व को 26 मई को मनाएंगे। उदय काल के मान से 26 मई को मनेगा पर्व
प्रसिद्ध ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 25 मई की सुबह 08:26 बजे से हो जाएगी, जो अगले दिन मंगलवार, 26 मई की सुबह 08:02 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, चूंकि उदय काल (सूर्योदय के समय) में दशमी तिथि 26 मई को मिल रही है, इसलिए इसी दिन गंगा दशहरा मनाना पूर्णतः शास्त्र सम्मत और श्रेष्ठ है।
गंगा दशहरा पर बन रहे हैं कई अद्भुत संयोग
आचार्य देवेंद्र ने बताया कि इस बार मंगलवार को गंगा दशहरा के अवसर पर ग्रहों और नक्षत्रों का बेहद दुर्लभ व मंगलकारी योग बन रहा है:
विशेष नक्षत्र व करण: इस दिन हस्त नक्षत्र और गर करण का संयोग रहेगा।
आनंदादि योग: इस पावन दिन आनंदादि योग का भी अद्भुत निर्माण हो रहा है, जो पूजा और स्नान के फल को कई गुना बढ़ा देता है।
ग्रहों की विशेष स्थिति: पर्व के समय कन्या राशि पर चंद्रमा और वृष राशि पर सूर्य विराजमान रहेंगे। ग्रहों की यह स्थिति श्रद्धालुओं के लिए अत्यधिक पुण्यदायी और कल्याणकारी सिद्ध होगी।
महत्व: इस अद्भुत संयोग में माँ गंगा में आस्था की डुबकी लगाने, दान-पुण्य करने और माँ गंगा का पूजन करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
