राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में कोर्स एन्हांसमेंट फॉर ग्रेजुएट एम्प्लॉयबिलिटी विषय पर आयोजित
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राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में कोर्स एन्हांसमेंट फॉर ग्रेजुएट एम्प्लॉयबिलिटी विषय पर आयोजित

 


त्रिदिवसीय कार्यशाला में नौ नए पाठ्यक्रम विकसित: प्रो. सत्यकाम


यूपीआरटीओयू में स्नातक रोजगारयोग्यता पर तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न

प्रकाशनार्थ

प्रयागराज, 6 मई। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में कोर्स एन्हांसमेंट फॉर ग्रेजुएट एम्प्लॉयबिलिटी विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुई। जिसके परिणामस्वरूप स्नातकों की रोजगारयोग्यता बढ़ाने के उद्देश्य से नौ नए शैक्षणिक कार्यक्रम विकसित किए गए। यह कार्यशाला ग्रेजुएट एम्प्लॉयबिलिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत कामनवेल्थ ऑफ़ लर्निंग तथा कामनवेल्थ एजुकेशनल मीडिया सेंटर फॉर एशिया के सहयोग से 4 से 6 मई 2026 तक आयोजित की गई।

समापन सत्र के अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा कि एक तरफ जहां इस त्रिदिवसीय कार्यशाला में 9 नए पाठ्यक्रम विकसित हुए हैं वहीं विश्वविद्यालय आगामी तीन महीनों में और अधिक व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के डिजाइन और विकास की योजना बना रहा है। जिसमें सभी युवा शिक्षकों की मेधा का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन पाठ्यक्रमों को मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज, मूक्स के माध्यम से संचालित किया जाएगा, ताकि वे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकें और समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हों। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी पहलों के अनुरूप अपने प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है तथा ऐसे पाठ्यक्रम विकसित कर रहा है जो बाजार की मांगों को पूरा करें और छात्रों की रोजगारयोग्यता को बढ़ाएं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अगले एक वर्ष में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करेगा और शिक्षा के क्षेत्र में सार्थक योगदान देता रहेगा। प्रो. सत्यकाम ने यह भी बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ऐसे अभिनव अंतर्विषयक पाठ्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना था, जो रोजगार और स्वरोजगार दोनों के अवसर उत्पन्न कर सकें। कॉमनवेल्थ ऑफ़ लर्निंग सेमका प्रोजेक्ट के सलाहकार प्रदीप कुमार चौधरी ने कहा कि कार्यशाला के दौरान तैयार किए गए पाठ्यक्रम आने वाले समय में समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत के अन्य विश्वविद्यालयों को भी यूपीआरटीओयू द्वारा विकसित इन पाठ्यक्रमों को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए, जिससे कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिल सके।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. त्रिविक्रम तिवारी के अतिथियों, शिक्षकों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए वर्तमान समय में बदलती रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप शैक्षणिक नवाचार के महत्व पर प्रकाश डाला और विश्वविद्यालय के उद्योगोन्मुखी शिक्षा के प्रयासों को रेखांकित किया। कार्यशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए आयोजन सचिव डॉ. गौरव संकल्प ने कार्यशाला के उद्देश्यों और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य वर्तमान परिप्रेक्ष्य में स्नातक रोजगारयोग्यता की अवधारणा को समझना और उसके महत्व को रेखांकित करना था। साथ ही, मौजूदा शैक्षणिक पाठ्यक्रमों और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच अंतर को पहचानना भी प्रमुख लक्ष्य रहा। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रमों को पुनः डिज़ाइन कर उन्हें अधिक कौशल-आधारित और रोजगारोन्मुखी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि कार्यशाला में स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग जैसे आधुनिक अवधारणाओं को उच्च शिक्षा में शामिल करने पर जोर दिया गया। कार्यशाला के दौरान एक फीडबैक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न संकायों के शिक्षकों ने अपने सुझाव और विचार साझा किए। उनके सुझावों से पाठ्यक्रमों को और अधिक प्रभावी एवं प्रासंगिक बनाने में सहायता मिली।विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. प्रभात चंद्र मिश्र ने बताया कि यह कार्यशाला कौशल-आधारित शिक्षा को सुदृढ़ करने और अभिनव पाठ्यक्रम विकास के माध्यम से स्नातकों की रोजगारयोग्यता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर आनंदानंद त्रिपाठी ने किया।

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