प्रदीप बच्चन (ब्यूरो चीफ)
बलिया (यूपी) मनियर स्थित श्री बांके बिहारी पैलेस में संगीतमय भागवत कथा का जोरदार प्रवचन, कंस वध की कथा ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। श्री बांके बिहारी पैलेस रानीपुर मनियर में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा चल रहा है। 7 फरवरी 2025 दिन शनिवार से प्रारंभ हुई यह कथा 13 फरवरी 2026 को शुक्रवार को समाप्त होगी। कथा व्यास सुनील पांडे के प्रवचनों ने श्रोताओं को भक्ति रस में डुबो दिया है।बुधवार को कथा व्यास ने कंस वध की रोमांचक कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण ने कंस का वध करने के बाद अपने नाना उग्रसेन को गद्दी पर बैठाया, जिन्हें कंस ने जेल में कैद कर रखा था। प्रवचन में सुनील पांडे ने कहा, "पुरुष बली नहीं होता है, समय बलवान होता है।" उन्होंने सुपुत्र और कुपुत्र के भेद पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो पुत्र पिता की संपत्ति व यश को बढ़ाए, वह सुपुत्र है, जबकि नष्ट करने वाला कुपुत्र।
कंस वध के बाद कृष्ण अपने माता-पिता देवकी-वासुदेव से मिले। कथा व्यास ने कहा कि जीवात्मा पर परमात्मा के आगमन से माया की हथकड़ियां टूट जाती है। देवकी ने पुत्र कृष्ण को गले लगा लिया। कथा में सुनील पांडे ने कई भक्तिमय गीत सुनाए, जैसे "उ अभागा बावे जेकर दुनिया में माई नईखे।" जनेऊ संस्कार पर उन्होंने कहा कि जनेऊ साधारण धागा नहीं, बल्कि नव देवताओं का आह्वान है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश विराजमान रहते हैं। यह भौतिक बाधाओं से रक्षा करता है और सूर्य का प्रकाश समाहित है। गुरु की महिमा का बखान करते हुए बोले, "गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागु पांय।"मित्र के त्याग पर चर्चा करते हुए गुरु माता-सुदामा प्रसंग सुनाया। गुरु माता ने लकड़ी तोड़ते समय सुदामा को चने की पोटली दी, जो शापित थी। एक गरीब ब्राह्मणी के घर चील ने चुराई थी और शाप दिया था कि खाने वाला निर्धन या कोढ़ी हो जाएगा। ज्योतिष विद्या से सुदामा ने पहचान लिया, लेकिन मित्र श्रीकृष्ण को बचाने स्वयं खा लिया।कथा में अनेक भजन व कथाएं सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर किया। यह आयोजन भक्ति का अनुपम संगम बन रहा है।

