राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में पंडित दीनदयाल ने समाज को देखने की एकात्मवादी दृष्टि दी- प्रोफेसर सिंह
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राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में पंडित दीनदयाल ने समाज को देखने की एकात्मवादी दृष्टि दी- प्रोफेसर सिंह



एकात्म मानववाद हमारे लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तम्भ- प्रोफेसर सत्यकाम 


मुविवि में पंडित दीनदयाल के विचार एवं सामाजिक दृष्टि विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सह व्याख्यान का आयोजन 


प्रकाशनार्थ 11/02/2026

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के सरस्वती परिसर स्थित लोकमान्य तिलक शास्त्रार्थ सभागार में बुधवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के तत्वावधान में पंडित दीनदयाल जी के विचार एवं सामाजिक दृष्टि विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सह व्याख्यान का आयोजन हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर योगेंद्र प्रताप सिंह, निदेशक, गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, झूंसी, प्रयागराज ने कहा कि पंडित दीनदयाल ने अपने जीवन में एकात्म होने की कोशिश की। समाज को देखने की एकात्मवादी दृष्टि पंडित दीनदयाल ने दी। समाज को समझने की उनकी दृष्टि बहुत अभिनव है। उनके विचार हमारी समझ को बहुत व्यापक बना देते हैं। प्रोफेसर सिंह ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार एवं सामाजिक दृष्टि विषय पर सविस्तार सोदाहरण विचार प्रस्तुत करते हुए पूंजीवाद, समाजवाद, साम्यवाद, व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि, परमेष्टि, लोकमत,जनमत, उदात्तीकरण परिष्कृति, प्राणवायु, गंगा जमुनी तहजीब, वेस्टर्न कल्चर ,सांस्कृतिक राष्ट्र, विकास, उन्नति, सत्यम, शिवम, सुंदरम, पाश्चात्य धर्म दर्शन, औपनिवेशिक विचार, जनजातिय समाज, एकात्म मानववाद, अंत्योदय आदि पर सविस्तार चर्चा करते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय की सामाजिक दृष्टि के लिए एक समेकित विचार की अनिवार्यता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि श्रमदान के स्थान पर श्रमानुभव किया जाए। गंगा जमुनी तहजीब के आगे क्या होगा इस पर विचार किया जाए। गांव गोद लिए जाने की अवधारणा को विस्तृत करते हुए बताया कि गांव की गोद में जाकर वहां के सांस्कृतिक परिवेश को साकार करना चाहिए। उन्होंने जनजातीय समाज संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया। 

अध्यक्षीय उद्बोधन में उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि एकात्म मानववाद हमारे लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तम्भ है। भारतीय चिंतन परंपरा के अनुसार हमें अपनी सोच, साहित्य, समाज को बदलना होगा। उन्होंने स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती, रविंद्रनाथ टैगोर एवं महात्मा गांधी के विचारों से युवाओं का मार्गदर्शन करने पर बल दिया जिससे युवा पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त हो सके। युवा पीढ़ी की रक्षा दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से ही संभव है। कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार हमारे विश्वविद्यालय का भी ध्येय वाक्य होना चाहिए। भारतीय ज्ञान परंपरा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचार मील के पत्थर हैं हमें न केवल पढ़ना चाहिए बल्कि उसे अपने आचरण में लाना चाहिए। 

वाचिक स्वागत एवं विषय प्रवर्तन प्रोफेसर संजय कुमार सिंह, निदेशक, पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ ने किया। उन्होंने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एक उच्च चिंतन परक विचार समाज को दिया। कार्यक्रम का संचालन अनुपम, असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी, मानविकी विद्याशाखा ने तथा आभार ज्ञापन प्रोफेसर एस कुमार, निदेशक, समाज विज्ञान विद्या शाखा ने किया। कार्यक्रम में शिक्षक एवं शोध छात्र आदि उपस्थित रहे।


डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र 

जनसंपर्क अधिकारी

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