मंडलायुक्त द्वारा चांद खमरिया कृष्ण मृग आरक्षित संरक्षित क्षेत्र पर महत्वपूर्ण बैठक एवं निरीक्षण करते हुए दिए आवश्यक निर्देश
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मंडलायुक्त द्वारा चांद खमरिया कृष्ण मृग आरक्षित संरक्षित क्षेत्र पर महत्वपूर्ण बैठक एवं निरीक्षण करते हुए दिए आवश्यक निर्देश



मंडलायुक्त द्वारा चांद खमरिया कृष्ण मृग आरक्षित संरक्षित क्षेत्र पर महत्वपूर्ण बैठक एवं निरीक्षण करते हुए दिए आवश्यक निर्देश


आज दिनांक 16 फरवरी 2026 को चांद खमरिया कृष्ण मृग आरक्षित संरक्षित क्षेत्र की सुरक्षा, संवर्धन एवं समग्र विकास हेतु मंडलायुक्त श्रीमती सौम्या अग्रवाल द्वारा मेजा तहसील परिसर में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा एवं स्थानीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। बैठक में वन विभाग, लघु सिंचाई विभाग, भू सुधार विभाग, राजस्व विभाग, ग्राम विकास विभाग, पर्यटन विभाग, इक्रीसैट (ICRISAT) एवं विश्व वन्यजीव कोष (WWF) के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र चांद खमरिया कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र की स्थापना, विस्तार एवं संरक्षण से संबंधित मुद्दे रहे। वन विभाग के डीएफओ अरविंद कुमार यादव ने बताया कि वर्तमान में यह क्षेत्र 126 हेक्टेयर भूमि पर घोषित है, जिसमें कृष्ण मृग जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र की स्थापना प्रक्रिया, शामिल भूमि के विवरण एवं अब तक की प्रगति पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। 


मंडलायुक्त ने बैठक में कई ठोस निर्देश जारी किए, जो क्षेत्र के संरक्षण एवं विकास को गति प्रदान करेंगे राजस्व विभाग एवं मेजा एसडीएम को निर्देशित किया गया कि आरक्षित क्षेत्र की 126 हेक्टेयर भूमि को नक्शे पर तथा स्थलीय निरीक्षण के माध्यम से चिन्हांकित कर वन विभाग को सुरक्षित हस्तगत करें। ग्राम समाज की अन्य उपलब्ध भूमि को भी शीघ्र चिन्हांकित एवं सीमांकित कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, ताकि ग्राम विकास विभाग द्वारा पूरे क्षेत्र की मजबूत बाउंड्री का निर्माण किया जा सके। बैठक के उपरांत मंडलायुक्त ने कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र का व्यक्तिगत भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने विचरण करते कृष्ण मृगों को देखा एवं स्थलीय स्थिति का जायजा लिया।स्थलीय निरीक्षण के आधार पर मंडलायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को निम्नलिखित तात्कालिक कार्यों के लिए निर्देश दिए क्षेत्र में जल स्रोतों के विकास हेतु तालाबों का निर्माण कराया जाए। वर्षा जल संचयन एवं भू-जल स्तर पुनर्भरण के लिए बंधियों का निर्माण सुनिश्चित किया जाए। घास के मैदान विकसित करने एवं वृक्षारोपण हेतु उपयुक्त पौधे लगाए जाएं। पूरे आरक्षित क्षेत्र की सीमा की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, जिसमें बाड़बंदी, निगरानी एवं अतिक्रमण रोकथाम शामिल हो। मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा प्रगति की समीक्षा के लिए शीघ्र ही अगली बैठक आयोजित की जाएगी। यह पहल प्रयागराज जनपद में वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी, जो स्थानीय समुदायों के सहयोग से कृष्ण मृग जैसे संकटग्रस्त प्रजातियों की रक्षा सुनिश्चित करेगी।

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