ट्रेन पर पथराव करने वालों की अब खैर नहीं, हाईटेक कैमरे में कैद होंगे चेहरे-भाव, ऐसे आएंगे पकड़ में
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ट्रेन पर पथराव करने वालों की अब खैर नहीं, हाईटेक कैमरे में कैद होंगे चेहरे-भाव, ऐसे आएंगे पकड़ में

 


ट्रेन पर पथराव करने वाले पत्थरबाजों की अब खैर नहीं। उन्हें पहचानना और उन पर लगाम लगाना आसान हो जाएगा। व्हीकल सर्विलांस कैमरे रेल इंजनों पर लगाए जाएंगे, जो ट्रैक व पटरियों के किनारे से पथराव करने वालों की फोटो के साथ उनकी भावनाओं तक को कैद कर सकेंगे।

आरडीएसओ ग्राउंड में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) व अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) की ओर से आयोजित इनो रेल प्रदर्शनी का समापन शनिवार को हो गया। प्रदर्शनी में सीपी प्लस की ओर से स्टॉल लगाया गया। यह कंपनी, सीसीटीवी कैमरे बनाती है। कंपनी के प्रतिनिधि यतींद्र ने बताया कि कंपनी रेलवे व डिफेंस सहित कई क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की सप्लाई करती है। हाल ही में नया व्हीकल सर्विलांस सिस्टम बनाया गया है। यह खासतौर पर ट्रेन पर होने वाले पथराव, पटरियों से छेड़छाड़ करने वालों पर अंकुश लगाने के लिए बनाया गया है।

उन्होंने बताया कि इस कैमरे के दो पार्ट हैं। एक कैमरा सामने ट्रैक पर नजर रखने के लिए तो दो कैमरे इंजन के साइड में लगाए जाते हैं। यह सर्विलांस कैमरे हाईस्पीड ट्रेनों के ट्रैक पर भी नजर रखने में सक्षम हैं। कैमरे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर काम करते हैं। इसके चलते ट्रेन पर पथराव और ट्रैक से छेड़छाड़ करने वालों की तस्वीरों के साथ उनके इमोशंस भी कैप्चर हो जाते हैं। जल्द ही इन्हें इंजनों पर लगाने की जिम्मेदारी मिल सकती है।


लोको पायलट की सुस्ती पर बजेगा अलार्म


प्रतिनिधि यतींद्र ने बताया कि रिवर्स ड्राइवर एनालिसिस सिस्टम (आरडीएएस) तैयार किया गया है। यह रेल इंजन के डैशबोर्ड पर लगाया जाता है। लोको पायलट अगर झपकी भी लेता है तो तत्काल यह सिस्टम आला अफसरों को अलर्ट भेज देता है। इससे ट्रेन हादसों पर भी अंकुश लगेगा।


झट से पता लगेगी सिग्नल की गड़बड़ी


सिग्नलिंग में गड़बड़ी तलाशने में अब रेलवे को मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। इनो रेल प्रदर्शनी में गैजइऑन कंपनी की ओर से रिमोट ऑपरेटेड डिवाइस बनाई गई है। कंपनी के प्रतिनिधि प्रयाग प्रदीप ने बताया कि ट्रैक के किनारे लाइन बॉक्स में इसे लगाया जाता है। एक डिवाइस स्टेशन पर लगती है। लाइन बॉक्स की डिवाइस ट्रैक मॉनिटर करती है और सिग्नलिंग में गड़बड़ी की सूचना तत्काल स्टेशन पहुंचाती है। एक डिवाइस 20 किमी सेक्शन कवर करती है। यह रियल टाइम डाटा तैयार करके भेजती है, जिससे सिग्नलिंग की गड़बड़ी आसानी से पता लग जाती है।

वाराणसी-दिल्ली बुलेट ट्रेन पर चर्चा

प्रदर्शनी में नेशनल हाईस्पीड रेल काॅरपोरेशन लिमिटेड के स्टॉल पर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की जानकारी लेने के लिए लोग पहुंचे। यहां प्रतिनिधियों ने इसकी खासियत बताई। इस सेक्शन के पूरा होने के बाद वाराणसी से दिल्ली के बीच भी बुलेट ट्रेन चलाई जानी है, जिसे लेकर चर्चा की गई। हालांकि यह अभी दूर की कौड़ी है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के स्टॉल पर भी भीड़ रही।


एनसीसी कैडेटों ने देखी हाइड्रोजन ट्रेन

नेवल एनसीसी के कैडेट शनिवार को प्रदर्शनी देखने पहुंचे थे। कैडेटों के साथ डॉ. विमलेश गुप्ता भी उपस्थित रहे। उनके नेतृत्व में आरडीएसओ के स्टॉल पर कैडेटों ने हाइड्रोजन ट्रेन की जानकारी ली। ट्रेन हादसों को रोकने के लिए तैयार की गई तकनीकों को समझा। एनसीसी कैडेटों ने प्रदर्शनी में रूस, ऑस्ट्रिया व जर्मनी के स्टॉलों का भी भ्रमण किया। इससे पूर्व आरडीएसओ डीजी उदय बोरवणकर ने स्टॉल का मुआयना किया।

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