प्रयागराज: संगम नगरी में अचानक बढ़ी पेट्रोल और डीजल की मांग ने जिले की आपूर्ति व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है। गुरुवार को शहर और ग्रामीण इलाकों के लगभग 30 पेट्रोल पंपों के टैंक पूरी तरह खाली हो गए, जिसके बाद पंप संचालकों को वहां ताले लगाने पड़े। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई पंपों पर सुबह से ही 'नो स्टॉक' के बोर्ड नजर आने लगे।
भीड़ बढ़ने से एक दिन में खत्म हुआ स्टॉक
सामान्यतः पेट्रोल पंपों पर दो से तीन दिन का बैकअप स्टॉक रखा जाता है, लेकिन पिछले 24 घंटों में अचानक ग्राहकों की संख्या में दो से तीन गुना इजाफा देखा गया। इस अप्रत्याशित भीड़ के कारण जो स्टॉक तीन दिन चलना था, वह महज एक दिन में ही समाप्त हो गया। सबसे ज्यादा किल्लत एचपीसीएल (HPCL) और बीपीसीएल (BPCL) के पंपों पर देखी जा रही है।
सप्लाई चेन और बैंक छुट्टी ने बढ़ाई मुश्किल
जिले में ईंधन आपूर्ति का गणित बिगड़ने के पीछे मुख्य रूप से दो कारण सामने आए हैं:
सप्लाई का स्रोत: प्रयागराज में आईओसीएल (IOCL) के 148 पंप हैं, जिन्हें स्थानीय स्तर पर बने प्लांट से सीधी सप्लाई मिल जाती है। इसके विपरीत, एचपीसीएल के 114 और बीपीसीएल के 106 पंपों को ईंधन के लिए लखनऊ, मुगलसराय और कानपुर जैसे शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है। बाहर से ट्रक आने में हो रही देरी ने संकट को और गहरा दिया है।
बैंकिंग अवकाश: गुरुवार को नवरात्रि के उपलक्ष्य में बैंकों में अवकाश होने के कारण पंप संचालक नई खेप के लिए भुगतान (Payment) नहीं कर सके। ट्रांजैक्शन न हो पाने की वजह से रिफिलिंग की प्रक्रिया में बाधा आई।
उपभोक्ताओं में अफरा-तफरी
जैसे ही पंपों के सूखने की खबर फैली, खुले हुए पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं। लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के साथ-साथ बोतलों और गैलनों में भी तेल भरवाते नजर आए। फिलहाल प्रशासन और तेल कंपनियां स्थिति को सामान्य करने के प्रयास में जुटी हैं, ताकि बाहर से आने वाली गाड़ियों को जल्द से जल्द जिले में प्रवेश दिलाया जा सके।
