तारुन थाना क्षेत्र के खौपुर गांव में इंटरलॉकिंग के नाम पर घटिया निर्माण करा कर शासन के धन का किया गया जमकर दुरुपयोग
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तारुन थाना क्षेत्र के खौपुर गांव में इंटरलॉकिंग के नाम पर घटिया निर्माण करा कर शासन के धन का किया गया जमकर दुरुपयोग

विभाग और ठेकेदारों में बना मेल, क्षेत्र में बदस्तूर जारी रहा घटिया निर्माण का खेल

खौंनपुर में देवी प्रसाद के घर से घनश्याम तिवारी के घर तक कराया गया इंटरलॉकिंग का कार्य

मनोज तिवारी ब्यूरो प्रमुख अयोध्या

तारुनथाना क्षेत्र के खौंपुर गांव में विगत सप्ताह भर से इंटरलॉकिंग का कार्य क्षेत्र पंचायत निधि के द्वारा ब्लॉक प्रमुख तारुन की स्वीकृति पर कराया गया जो लगभग 243 मीटर इंटरलॉकिंग का कार्य घटिया निर्माण की भेंट चढ़ चुका है ।आपको बताते चलें की 243 मी इंटरलॉकिंग का कार्य उपरोक्त गांव के लिए ब्लॉक प्रमुख निधि से लगभग 12 लख रुपए की लागत से कराया जा रहा था जोकि करीब तीन-चार दिन पहले पूरा हो चुका है जिसमें ठेकेदार द्वारा मानक की धज्जियां उड़ाकर पीले ईट का प्रयोग कर रेजिंग का कार्य कराया गया जिसमें तीन बोरी मोरंग पांच बोरी बालू तथा एक बोरी सीमेंट मिलकर रैगिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया 243 मीटर इंटरलॉकिंग में मात्र 22 बोरी सीमेंट का प्रयोग किया गया इंटरलॉकिंग बिछाते समय पटे पटाए चक रोड पर गिट्टी की कुटाई पीली ईंट से कराकर उसके ऊपर ढेर सारा बालू डालकर उसी पर इंटरलॉकिंग का ईट बढ़ा दिया जा रहा है। जबकि जब से कार्य शुरू हुआ तब से आज तक जिला तहसील ब्लाक आज क्षेत्र से कोई भी अधिकारी कर्मचारी कार्य का जायजा लेने तक नहीं आया जिससे मन मुताबिक ठेकेदार द्वारा घटिया निर्माण करा कर धन और मुक्त कराकर अपनी जेब गर्म कर रहे हैं। लेबरों द्वारा पूछने पर नाम न छापने की शर्त पर बताया गया कि ठेकेदार द्वारा हम लोगों को यही मानक बताया गया है इसके विपरीत हम लोग कुछ करते हैं तो हमको ठेकेदार का कोप भाजन का शिकार होना पड़ेगा । जिसकी वजह से ठेकेदार द्वारा मात्र 23 बोरी सीमेंट में 243 मी रेसिंग का काम कर दिया गया जिसमें मानक की धज्जियां उड़ाकर इंटरलॉकिंग का कार्य कराया जा रहा है जो अब लगभग पूर्ण होने की स्थिति में है। सूत्रों द्वारा बताया गया कि उक्त निर्माण पूरी तरह से बरसात होने पर जगह-जगह गड्डो में तब्दील हो सकता है। ब्लॉक प्रमुख के कोटे से उपलब्ध इंटरलॉकिंग भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया आज तक कोई अधिकारी कर्मचारी निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन तक नहीं कराया गया जबकि निर्माण कर पूरा हो गया शायद सूत्रों ने बताया की 12 लाख की प्रोजेक्ट में मात्र ₹500000 खर्च करने पर 245 मी इंटरलॉकिंग का कार्य पूरा हुआ शेष 7 लाख रुपए अधिकारियों तथा ठेकेदारों ने बंदर बांट कर लिया मानक की धज्जियां उड़ाकर कराये गये इस इंटरलॉकिंग काम में ठेकेदार के अलावा जिम्मेदार अधिकारी भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में लगे है।

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