प्रयागराज: भारत एक कृषि प्रधान देश है. लगभग 50 प्रतिशत लोग खेती किसानी में जुड़े हैं और उसी से अपना जीवन यापन करते हैं. इनमें सीमांत किसानों की संख्या सबसे ज्यादा है. जागरूकता के अभाव में संसाधनों का सही प्रयोग ना कर पाने से इन किसानों को खेती में घाटा भी आ जाता है. भारत सरकार निरंतर प्रयास कर रही है कि किसान जीवन निर्वाह कृषि से ऊपर उठकर व्यावसायिक कृषि में योगदान दें. इसके लिए कई प्रोजेक्ट के माध्यम से किसानों को जागरूक करने का काम करती है. अलग-अलग जनपदों में किसान मेले के आयोजन भी किए जाते हैं. सहसों स्थित अजीत सिंह डिग्री कॉलेज के छात्रों ने किसानों को जागरूक करने के लिए शिक्षक के मार्गदर्शन में पॉलीहाउस, ग्रीन पॉली हाउस ,सोलर पंप, ड्रिप सिंचाई, ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण जैसे प्रोजेक्ट बनाकर किसानों के सामने पेश किया. यह प्रोजेक्ट सीमांत किसानों के लिए काफी फायदेमंद है. सीमांत किसानों के खेत का क्षेत्र छोटा होने से पैदावार पर काफी नकारात्मक असर पड़ता है. पॉलीहाउस के माध्यम से किसान छोटे से एरिया में ही व्यावसायिक कृषि कर सकते हैं. वही ग्रीन पॉली हाउस सूरज से आने वाली नुकसानदायक किरणों से फसलों की रक्षा करता है और प्रकाश संश्लेषण का एनवायरमेंट तैयार करता है. इन छात्रों ने मिलकर तैयार किया प्रोजेक्ट
अजीत सिंह डिग्री कॉलेज के बीएससी एग्रीकल्चर के तीसरे वर्ष के छात्र राजाराम यादव, कृष्णकांत वर्मा ,सूरज कुमार, प्रदीप कुमार ,उज्जवल, रचना यादव ,प्रतिमा यादव ,शैली पटेल ,रितिका तिवारी ,नवनीत राय ने मिलकर इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार किया. इस प्रोजेक्ट में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है. इससे साबित होता है कि कृषि में प्रयोग होने वाली नवाचार पर महिलाएं भी शामिल हो रही है और वैज्ञानिक स्तर पर कार्य कर रही हैं क्या कहती है रचना यादव
रचना यादव ने ड्रिप सिंचाई की पद्धति का प्रोजेक्ट तैयार किया है. वह बताती है कि उत्तर भारत में सीमांत किसानों की संख्या ज्यादा है . उनको सिंचाई में काफी असुविधा होती है. एड्रेस सिंचाई के माध्यम से सिंचाई करने पर किसानों के खेत में अतिरिक्त खरपतवार नहीं होगी और उसके साथ ही जल संरक्षण का भी कार्य हो सकेगा.
इसको तैयार करने में आएगी कितनी कीमत
उप जिला कृषि अधिकारी विकास मिश्रा बताते हैं कि पॉलीहाउस, ग्रीन पॉली हाउस, सोलर पंप जैसे प्रोजेक्ट को अगर बनवाना चाहते हैं तो इसमें सरकार की तरफ से सब्सिडी भी दी जाती है. एक हेक्टेयर में बनाए जा रहे पॉलीहाउस की कीमत लगभग एक करोड रुपए आती है. वही ग्रीन हाउस- ग्रीन पॉली हाउस बनाने के लिए इसे थोड़ा कम खर्च होता है. किसान के इस प्रोजेक्ट को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार लगभग 40% अनुदान किसानों को देती है. जिससे किसान व्यावसायिक स्तर पर खेती कर सकें.
