बेशकीमती लकड़ियों की नही थम रही कटान,वन माफिया लगातार सक्रिय
गोण्डा। क्षेत्र के टिकरी रामगढ रेंज पर वन माफिया लगातार सक्रिय हैं। संरक्षित वन क्षेत्रों की बेशकीमती लकड़ियों की कटान थमने का नाम नहीं ले रही है। इन वन माफियाओं द्वारा करोड़ रुपये की क्षति सरकार को अब तक पंहुचाई जा चुकी है। वहीं अब दर्जनों मामलों में एक-दो मामलों में कार्रवाई करने के बाद प्रेस-कांफ्रेंस करके वन विभाग के जिम्मेदार अपनी पीठ खुद थपथपा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार टिकरी रेंज पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में वन क्षेत्राधिकारी विनोद कुमार नायक ने बताया कि सोमवार को कोतवाली क्षेत्र मनकापुर के परसापुर थनवा-निबिहा मार्ग पर मुखबिर खास से मिली सूचना के आधार पर एक पिकप को रोकने का प्रयास किया गया लेकिन पिकप लेकर चालक भागने लगा तब वनविभाग के द्वारा फायरिंग की गई तो वह पिकप छोड़ फरार हो गया। जब पिकप की जांच की गई तो पिकप पर जंगल की करीब 12 बोटा सागौन लकडी बरामद हुई इस पिकप पर चालक सहित कुल चार लोग सवार थे। जांच करने पर ज्ञात हुआ कि गाडी मालिक उदय सिंह पुत्र अजय सिंह निवासी भिटौरा मनकापुर व उस पिकप का ड्राइवर संतराम पुत्र जवाहरलाल निवासी मनकापुर बंदरहा का रहने वाला है। इस मामले में दो नामजद और दो अज्ञात सहित चार लोगों पर 26 वन अधिनियम , 41/42,52क वनाधिनियम तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बीते शुक्रवार को वनविभाग ने कोतवाली क्षेत्र के गैलन ग्रंट गांव के जमुनहा में ग्रामीण अंचल की एक पिकप पर लदी सागौन की लकड़ी को पकड़ा था। इन दोनो मामले में वनविभाग वनाधिनियम तहत कार्रवाई की गई है । इस मौके पर डिप्टी रेंजर प्रभात कुमार, वनदरोगा मनीष सिंह, पशुपतिनाथ शुक्ला सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
टिकरी वन रेंज सहित क्षेत्र में बीते कई माह लगातार सागौन, साखू, के साथ आम, महुआ, शीशम, जामुन, नीम जैसे प्रतिबंधित वृक्षों की कटान बड़े पैमाने पर चल रही। कई बार लकड़ी कटान के मामलों में वन क्षेत्राधिकारी की किरकिरी भी हो चुकी है। बीते 06 माह में लगभग 02 दर्जन से भी ज्यादा मामले बड़े पैमाने पर हुई वृक्षों की कटान के प्रकाश में आ चुके हैं जिनमें से अधिकतर मामलों में कारवाई के नाम आश्वासन का झुनझुना ही मिला है। आखिर क्या कारण रहा है कि वन माफियाओं के हौंसले बीते कुछ माह में इस कदर बढ़ गये कि अब उनका आरा संरक्षित वन क्षेत्रों में चलने से भी नहीं झिझक रहा है। अगर ये सिलसिला खत्म करने है तो सबसे पहले वन विभाग के जिम्मेदारों को अपने गिरेबान में झांकना पडेगा।
गोण्डा से ब्यूरो रिपोर्ट शिव शरण
