मिर्जापुर। विंध्याचल के कच्चे घाटों के दिन अब दिन बहुरने वाले हैं। कच्चे घाटों को 88 करोड़ रुपये खर्च कर पक्का कराने की तैयारी है। इसके अलावा शहर में स्थित घाटों की मरम्मत कराकर सुंदरीकरण भी कराया जाएगा। यह जानकारी जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी।
उन्होंने बताया कि नगर में तो अधिकांश घाट पक्के बने हुए हैं, लेकिन विंध्याचल में अधिकांश घाट कच्चे हैं। वहां विंध्य काॅरिडोर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम चल रहा है। अब इसके लिए 88 करोड़ की कार्ययोजना बनाकर 700 मीटर तक पक्के घाटों का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए कार्ययोजना शासन को भेज दी गई है और उसे स्वीकृति भी मिल गई है। इसके साथ ही गंगा किनारे के 1400 मीटर लंबे पक्के रास्ते का निर्माण भी कराया जाएगा। ताकि लोगों को घाटों पर आवागमन में सुविधा हो सके। जिलाधिकारी ने कहा कि पक्के रास्ते के निर्माण से गंगा को जीवंतता मिलेगी। उन्होंने कहा कि वाराणसी में किसी भी समय गंगा किनारे कोई चला जाय तो वहां लगेगा ही नहीं कि रात है अथवा कोई और समय है। विंध्याचल में भी इस प्रकार का रास्ता बन जाने से वहां कार्यक्रमों के लिए जगह की कोई कमी नहीं रहेगी और गंगा की जीवंतता भी बनी रहेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मार्ग वाहनों के लिए प्रतिबंधित रहेगा। केवल आपातकाल में ही इसका प्रयोग किया जा सकेगा। यह मार्ग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एक उपयुक्त स्थान होगा। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही कई अन्य कार्य भी कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 80 लाख रुपये खर्च कर नगर में स्थित घाटों का सुंदरीकरण किया जाएगा। मिशन शृंखला के तहत यह कार्य होना है।
इसके तहत पक्का घाट, बरियाघाट, संकठाघाट, दाऊजी घाट, नारघाट आदि के मरम्मत के साथ ही सुंदरीकरण भी कराया जाएगा। इसके तहत घाट अथवा सीढि़यों की मरम्मत, रंगाई पोताई, पालिश व पेंटिंग, म्यूरल पेंटिंग, फसाड लाइटिंग, हाईमास्ट, चेंजिंग रूम आदि की व्यवस्था की जाएगी। इसी प्रकार सिंचाई विभाग की ओर से घाटों पर बालू की बोरियों से तकनीकी तरीके से ढाल बनाकर कटान रोधी कार्य किया जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया कि घाटों पर अराजक तत्वों पर नजर रखने व सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। म्यूरल पेंटिंग के जरिए गंगावतरण व अन्य धार्मिक घटनाक्रम घाटों पर दर्शाए जाएंगे। यह कार्य काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विद्यार्थी करेंगे। उन्होंने बताया कि धार्मिक आयोजन के दौरान फूल आदि वस्तुएं गंगा में सीधे प्रवाहित कर दी जाती हैं। उसके लिए घाट पर एक कलशनुमा आकृति का पात्र रखा जाएगा। जिसमें ये फूल -पत्ती आदि रखे जाएंगे।