प्रयागराज: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या के मामले में आरोपी शिष्य आनंद गिरि की जमानत अर्जी की सुनवाई नहीं हो सकी। याची अधिवक्ता के अन्य कोर्ट में व्यस्त होने के कारण उनकी तरफ से अनुरोध पर सुनवाई टाल दी गई। अगली सुनवाई 16 मई को होगी। 22 सितंबर को गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद भेजा गया था आनंद को जेल यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता ने आनंद गिरि की जमानत अर्जी पर दिया है। अर्जी पर वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी, सी बी आई के वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश व संजय कुमार यादव व शिकायत कर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विनय सरन पक्ष रख रहे हैं। इससे पहले कोर्ट ने सीबीआई को आनंद गिरी के खिलाफ आस्ट्रेलिया मे दर्ज आपराधिक केस की अतिरिक्त जानकारी के साथ हलफनामा दाखिल करने को कहा था। महंत नरेंद्र गिरि की मौत की रात ही आनंद गिरि को गिरि को हरिद्वार से हिरासत में लिया था। इसके बाद पूछताछ की जाती रही। 22 सितंबर को गिरफ्तारी के बाद आनंद गिरि से सीबीआइ ने कई दिन तक पूछताछ की थी, फिर जेल भेज दिया गया। महंत के सुसाइड का घटनाक्रम रहा लंबे समय तक सुर्खियों में
श्री मठ बाघम्बरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के भी अध्यक्ष रहे। 20 सितंबर को दिन में वह मठ के अतिथि कक्ष में पंखे में बंधी रस्सी के फंदे से लटके मिले थे। तब आनंद गिरि के अलावा लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी रहे आद्या प्रसाद तिवारी और उसके बेटे को भी आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तीसरे रोज जांच सीबीआइ को सौंप दी गई थी। सीबीआइ ने लंबी तहकीकात के बाद इस घटना में आनंद समेत तीन आरोपितों के खिलाफ आत्महत्या के लिए विवश करने की चार्जशीट दायर की थी।
