
प्रयागराज: प्रयागराज के अलग-अलग थानों में कई वर्षों से कई धाराओं में दर्ज मुकदमे की
विवेचना लंबित है। जिन मुकदमे में आरोपितों के विरुद्ध चार्जशीट अथवा
फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है उसे भी कोर्ट में दाखिल नहीं किया गया है। ऐसे
मामले करीब 20 हजार के आसपास हैं। प्रयागराज जिले के विभिन्न थानों में लिखे गए करीब 20 हजार मुकदमे ऐसे हैं,
जिनमें चार्जशीट और फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लग चुकी है। इसके बाद भी उनकी
फाइल थाना और सीओ स्तर पर ही लंबित है। हालांकि इन केसों की फाइल को समय पर
अदालत में दाखिल कर दिया जाना चाहिए था। पुलिसकर्मियों के इस ढुलमुल रवैये
के चलते मुकदमा वादी यानी पीडि़त अब और परेशान हो रहे हैं। दूसरी ओर
विभागीय अधिकारियों पर काम का बोझ बढ़ रहा है। यह हाल तब है जब एसएसपी की
ओर से कई दिन पहले ही इस संबंध में अधीनस्थ अधिकारियों, कर्मचारियों को
सख्त निर्देश दिया गया था।
वर्षों से दर्ज मुकदमे की विवेचना लंबित है
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग थानों में कई वर्षों से विभिन्न धाराओं में दर्ज मुकदमे की विवेचना लंबित है। इतना ही नहीं, जिन मुकदमे में आरोपितों के विरुद्ध चार्जशीट अथवा फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है, उसे भी कोर्ट में दाखिल नहीं किया गया है। ऐसे मामले करीब 20 हजार के आसपास हैं।
एसएसपी ने पुलिसकर्मियों का ढुलमुल रैवैये को जिम्मेदार बताया थाकुछ दिन पहले एसएसपी ने एडिशनल एसपी और सीओ की पुलिस लाइंस में मीटिंग की थी, जिसमें मुकदमों के विवेचना व उनकी अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई थी। इस दौरान पाया गया कि गंगापार, यमुनापार और शहर के थाने हजारों केस की फाइल लंबित है। इसकी वजह पुलिसकर्मियों के ढुलमुल रवैये को जिम्मेदार माना गया। निर्देश के अनुपालन की जांच के लिए ही सोमवार सुबह एसएसपी सीओ सिविल लाइंस के दफ्तर पहुंच गए, जहां जांच में कई तरह की लापरवाही सामने आई। इस पर उन्होंने एसपी सिटी से जांच कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
बोले, प्रयागराज के एसएसपी
प्रयागराज के एसएसपी अजय कुमार ने कहा कि यह बात सही है कि चार्जशीट और एफआर लगे मुकदमों की फाइल पेंडिंग है। उन्हें जल्द से जल्द कोर्ट में दाखिल करने और विधिक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है।
