
प्रयागराज: बहुत कम लोगों को पता होगा कि कौशाम्बी की अपनी पांडुलिपि थी। प्राचीन काल की यह पांडुलिपि कैसी थी, उस वक्त कैसे
व्यापार होता था, इसका वर्णन इतिहास में बहुत कम मिलता। स्वतंत्रता संग्राम
में फाफामऊ, प्रतापगढ़, फूलपुर से भी कई राष्ट्र नायकों ने अपना सर्वस्व
न्यौछावर कर दिया, लेकिन इतिहास में वे गुमनाम हैं।
चंद लोगों के नाम ही सामने आते हैं। इतिहास के पन्नों में फांसी इमली नाम
के पेड़ का कहीं जिक्र नहीं मिलता, जहां तमाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों
ने शहादत दी। इतिहास के गुमनाम राष्ट्र नायकों और ऐसे ही महत्वपूर्ण
तथ्यों की खोज के लिए प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय में 29 एवं 30 मार्च को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी होने
जा रही है।
सरस्वती हाईटेक सिटी, नैनी स्थित राज्य विवि के नवनिर्मित परिसर में आयोजित
होने जा रही संगोष्ठी में ‘क्षेत्रीय इतिहास लेखन के निर्माण में
चुनौतियां, समस्याएं एवं समाधान’ और ‘इतिहास लेखन के निर्माण में
पुस्तकालयों की उपादेयता’ विषयों पर मंथन किया जाएगा।
