OBC आरक्षण, स्थानीय नीति और भाषा विवाद बना सिर्फ राजनीतिक मुद्दा
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OBC आरक्षण, स्थानीय नीति और भाषा विवाद बना सिर्फ राजनीतिक मुद्दा




रांची. झारखंड़ बजट सत्र के मुख्यमंत्री प्रश्नकाल में फिर एक बार OBC आरक्षण से लेकर जिला स्तर पर नियुक्ति में हिंदी भाषा को शामिल करने का मुद्दा सदन में उठा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि OBC आरक्षण, स्थानीय नीति और भाषा विवाद राजनीतिक मुद्दा बन गया है. पहले की सरकार ने क्या किया ये सब लोग जानते हैं, वर्तमान सरकार इन मुद्दों को लेकर काफी गंभीर है. झारखंड़ विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को मुख्यमंत्री प्रश्नकाल के दौरान नीतिगत सवाल सदन के पटल पर आये. आजसू विधायक लंबोदर महतो ने झारखंड़ राज्य पिछड़ा आयोग के द्वारा 36 से 50 प्रतिशत तक OPC आरक्षण की अनुशंसा का मामला उठाया. महाराष्ट्र और तमिलनाडु का हवाला देते हुए 50 प्रतिशत तक आरक्षण देने की मांग की.इस सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पहले OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलता था और उसे घटा कर 14 प्रतिशत कर दिया गया. किसने किया ये सभी जानते है. राज्य सरकार आरक्षण को लेकर अध्ययन कर रही है. राज्य सरकार उसके बाद विधि सम्मत निर्णय लेगी. मुख्यमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा हुआ तो ST / SC को यूक्रेन भेजना होगा.आजसु सुप्रीमो सुदेश महतो ने उठाया मुद्दा बता दें, झारखंड में लंबे समय से जारी विस्थापन के मुद्दे को आज आजसू विधायक सुदेश महतो ने उठाया. आजसू विधायक सुदेश महतो ने राज्य में विस्थापन आयोग के गठन की मांग की. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में विस्थापन की समस्या को स्वीकार किया. साथ ही ये भी कहा कि ये कोई नया मामला नहीं 50 साल से अधिक समय से ऐसा हो रहा है और मुआवजा भी मिल रहा. हालांकि राज्य सरकार विस्थापन आयोग के गठन पर बहुत जल्द निर्णय लेगी.मुख्यमंत्री प्रश्नकाल में उठे कई सवाल मुख्यमंत्री प्रश्नकाल में जिला स्तर पर नियुक्ति में क्षेत्रीय भाषा के तौर पर हिंदी को शामिल करने का मुद्दा सदन में फिर एक बार उठा. बीजेपी कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने कहा कि राज्य में 90 प्रतिशत हिंदी भाषा बोली जाती है. हिंदी को अनिवार्य भाषा की सूची से बाहर करना सही नहीं है. इस सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि OBC आरक्षण, स्थानीय नीति और भाषा को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है. प्रश्न पत्र 1 में पहले से ही हिंदी और अंग्रेजी शामिल है. इसमें पास करना अनिवार्य है. जब पहले से हिंदी और अंग्रेजी शामिल है तो क्षेत्रीय भाषा क्यों शामिल किया जाए. हिंदी को हटाया नहीं गया है, सिर्फ स्थानीय लोग की भागीदारी को सुनिश्चित किया जा रहा है.मुख्यमंत्री प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक उमाशंकर अकेला और अम्बा प्रसाद का सवाल नीतिगत नहीं होने के कारण इस पर चर्चा नहीं हो सकी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आरक्षण-विस्थापन आयोग और भाषा पर सरकार का नजरिया स्पष्ट करने के साथ-साथ इसे राजनीतिक भी करार दिया.
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