सुलेम सराय के रफीक तीन दिन पहले अपने बीमार बच्चे को लेकर सरोजनी नायडू चिल्डेन हॉस्पिटल पहुंचे। डॉक्टरों ने उनके बच्चे को इमर्जेंसी वार्ड में भर्ती किया और ऑपरेशन अनिवार्य बताया। लेकिन हॉस्पिटल के आईसीयू वार्ड में बेड खाली नहीं होने की वजह से बच्चे का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। रफीक बताते हैं कि उनके पास इतना पैसा भी नहीं है कि, वह दूसरे निजी अस्पताल में जाएं। उनका बच्चा बीमारी से तड़प रहा है। इंतजार के सिवाय दूसरा कोई उपाय नहीं है।
यह कहानी एक सिर्फ रफीक की नहीं है। यहां अपने बच्चों को इलाज के लिए लेकर आने वाले सभी मां-बाप को ऑपरेशन के लिए कई दिनों तक का इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल के डॉक्टर आईसीयू फुल बता रहे हैं। बच्चों के ऑपरेशन की बाट जोह रहे तीमारदारों को आईसीयू के पास फर्श पर कई दिनों तक डेरा डाले देखा जा सकता है।मात्र नौ हैं आईसीयू के क्रिटिकल बेड
करीब 100 बेड वाले सरोजनी नायडू चिल्डेन हॉस्पिटल में आईसीयू के मात्र नौ बेड हैं। ऑपरेशन के इंतजार में सभी बेडों पर बच्चे पड़े हुए हैं। जिसकी वजह से दूसरे बच्चों को समय से ऑपरेशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टरों और कर्मचारियों ने बताया कि बेड के खाली होते ही दूसरे जरूरतमंद बच्चे का ऑपरेशन किया जाता है। बेड खाली नहीं होने की वजह से बच्चों की इलाज में विलंब होता है। आईसीयू में सेवा दे रहीं डॉक्टर तान्या ने बताया कि फिलहाल सभी बेड फुल हैं। बेड खाली होने के बाद ही दूसरे बच्चों का ऑपरेशन किया जाएगा।
