प्रदीप बच्चन (व्युरो चीफ)
बलिया (यूपी)। नगर पंचायत नगरा स्थित पुरानी दुर्गा मंदिर के प्रांगण में आयोजित प्राचीन आदर्श रामलीला कमेटी, नगरा की रामलीला में भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ा अत्यंत भावुक एवं मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इस दौरान भरत जी और शत्रुघ्न जी ऋषि-मुनियों के साथ अयोध्या से वन में भगवान श्रीराम को वापस लाने तथा उनका वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटने का आग्रह करने पहुँचे।
भरत जी ने भगवान श्रीराम से अयोध्या वापस चलकर राजपाट संभालने की विनती की, लेकिन पिता के वचन का पालन करने के संकल्प पर अडिग प्रभु श्रीराम ने वनवास की अवधि पूरी होने से पहले अयोध्या लौटने से इनकार कर दिया। इसके पश्चात भगवान श्रीराम ने अपनी चरण-पादुकाएँ (खड़ाऊँ) भरत जी को सौंप दीं और उन्हें अयोध्या वापस लौटने के लिए विदा किया।
यह प्रसंग भाई-भाई के अटूट प्रेम, त्याग, समर्पण, मर्यादा और धर्मपालन का अनुपम उदाहरण है। रामलीला के इस मार्मिक मंचन ने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया तथा भगवान श्रीराम और भरत जी के आदर्शों का संदेश दिया।
रामलीला के प्रमुख व्यासगण: रमेश पाठक, पवन पाठक, उमेश पाठक, रवि पाठक एवं राजा पाठक।
आयोजक: संजय सिंह एवं रितेश चौरसिया।
प्राचीन आदर्श रामलीला कमेटी, नगरा द्वारा आयोजित यह धार्मिक आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

