नैनी प्रयागराज/लौह पुरुष ,भारत रत्न, किसानों के मसीहा, अखंड भारत के रचयिता एवं राष्ट्रीय एकता के प्रतीक श्रेष्ठ भारत के शिल्पकार सरदार वल्लभभाई पटेल की 151 वीं जयंती के पूर्व संध्या के अवसर पर सुमित्रा देवी ग्रामीण सेवा संस्थान के तत्वाधान में नंदन तालाब मे चौपाल का आयोजन किया गया। सभी उपस्थित बच्चे- बूढ़े और नौजवान ने सर्वप्रथम उनके पोर्ट्रेट चित्र पर आरती उतारी। इस अवसर पर
सुविख्यात समाजसेवी व भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा काशी क्षेत्र,क्षेत्रीय उपाध्याय सरदार पतविन्दर सिंह ने कहा कि भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है देश की रियासतों का एकीकरण कर एक सूत्र में पिरोने मे सरदार वल्लभभाई पटेल का भारत की राजनीति और राष्ट्र-निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक योगदान रहा है। उन्हें भारत के 'लौह पुरुष' और 'राजनीतिक एकीकरण के जनक' के रूप में जाना जाता है।
कनिष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय श्रीवास्तव ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत का राजनीतिक एकीकरण (560 से अधिक रियासतों का विलय) 1947 में जब देश आज़ाद हुआ, तब भारत छोटे-बड़े लगभग 565 से अधिक स्वतंत्र देशी रियासतों में बंटा हुआ था। सरदार पटेल ने अपनी असाधारण कूटनीति, संवाद और दृढ़ इच्छाशक्ति से लगभग सभी रियासतों को भारतीय संघ में शांतिपूर्वक मिलाया। जहाँ कूटनीति काम नहीं आई (जैसे जूनागढ़ और हैदराबाद), वहाँ उन्होंने कठोर और निर्णायक कदम उठाए।
सौरभ यादव ने कहा कि आज़ादी के बाद 1947 से 1950 तक उन्होंने देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। देश के विभाजन के बाद उत्पन्न शरणार्थी समस्या, आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियों को संभालने में उनकी मुख्य भूमिका रही।तेजस यादव,परी पांडे,सोहेल अहमद,यथार्थ मिश्रा,योगेन्द्र पांडे, मन्नत मिश्रा,नीलेश चतुर्वेदी, सुमित सिंह कृष्ण शर्मा आर्य,सौरव यादव सरदार पतविंदर सिंह,संजय श्रीवास्तव सहित कई सामाजिक राजनीतिक गणमान्यजन लोगों ने अपने विचार रखें।

