प्रयागराज। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और शिक्षा जगत के पुरोधा प्रोफेसर देवेंद्र प्रताप सिंह का अस्थि कलश सोमवार को प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र त्रिवेणी संगम में विधि-विधान के साथ विसर्जित कर दिया गया। लखनऊ से लाए गए अस्थि कलश को उनके पौत्र ऋजु और यजु ने जल में प्रवाहित किया। इस दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं और वातावरण "प्रो. डी.पी. सिंह अमर रहें" के नारों से गूंज उठा।
अस्थि विसर्जन के बाद संगम तट पर आयोजित भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया।
सादगीपूर्ण जीवन के प्रतीक थे प्रो. सिंह: डॉ. गौर
श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह गौर ने कहा कि प्रो. डी.पी. सिंह सादगीपूर्ण जीवन शैली के सच्चे हिमायती थे। कुलपति जैसे उच्च पद पर रहते हुए भी उन्होंने कभी आडंबर को प्रश्रय नहीं दिया। उनके संस्कार ही उनके पद की गरिमा बढ़ाते थे। मुक्त विश्वविद्यालय को घर-घर तक पहुँचाने में उनका योगदान अतुलनीय है।
दूरस्थ शिक्षा को पहुँचाया वंचितों तक
विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि प्रो. सिंह ने दूरस्थ शिक्षा को गरीब, वंचित और ग्रामीण विद्यार्थियों तक पहुँचाने का जो सपना देखा था, उसे आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. अनिल कुमार सिंह भदौरिया ने उन्हें 'अजातशत्रु' बताते हुए उनके अनुशासन, त्याग और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को रेखांकित किया।
कई प्रमुख हस्तियां रहीं उपस्थित
सभा में कुलसचिव कर्नल विनय कुमार, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. के.पी. सिंह, प्रो. बी.एन. सिंह, प्रो. राधेश्याम सिंह, डॉ. प्रभात चन्द्र मिश्र, डॉ. गौरव सिंह गौर, कैप्टन बलवंता यादव, रंजीत बनर्जी सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी और कई अधिवक्ता मौजूद रहे।
अंत में प्रो. डी.पी. सिंह के पुत्र एवं डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रो. संजय सिंह ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।

