मेजा के चांद खमरिया कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र का मंडलायुक्त ने किया निरीक्षण: बाउंड्री निर्माण, जल प्रबंधन और ईको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
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मेजा के चांद खमरिया कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र का मंडलायुक्त ने किया निरीक्षण: बाउंड्री निर्माण, जल प्रबंधन और ईको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा


प्रयागराज 19 सितंबर

प्रयागराज के मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने शनिवार को मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती हर्षिका सिंह, फॉरेस्ट कंजरवेटर, डीएफओ और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ मेजा तहसील स्थित चांद खमरिया कृष्ण मृग (Black Buck) आरक्षित क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आरक्षित क्षेत्र की सुरक्षा, जल प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और समग्र विकास के लिए विभागवार कार्ययोजना बनाकर तुरंत क्रियान्वयन के निर्देश दिए। मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती हर्षिका सिंह, फॉरेस्ट कंजरवेटर, डीएफओ एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ मेजा तहसील स्थित चांद खमरिया कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने आरक्षित क्षेत्र की सुरक्षा, संरक्षण, जल प्रबंधन, जैव विविधता एवं समग्र विकास के लिए विभागवार कार्ययोजना तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


निरीक्षण के दौरान आरक्षित क्षेत्र की शेष भूमि का डी-मार्केशन कराते हुए स्पष्ट सीमांकन सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही, वर्षा जल संचयन, तालाब एवं बंधियों के निर्माण तथा आवश्यकतानुसार वृक्षारोपण के माध्यम से क्षेत्र के प्राकृतिक पर्यावरण को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया।


आरक्षित क्षेत्र में निवास कर रहे लोगों के पुनर्वास के संबंध में मंडलायुक्त ने उन्हें एक स्थान पर आवासीय कॉलोनी के रूप में व्यवस्थित रूप से बसाने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को मुख्यमंत्री आवासीय योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों के आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने को कहा।


कृष्ण मृगों के लिए पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के दृष्टिगत एनटीपीसी के सीएसआर फंड के माध्यम से क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर सोलर पंप आधारित ब्लास्ट वेल विकसित करने के निर्देश दिए गए। इनसे छोटे तालाब विकसित कर मृगों के लिए वर्षभर जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इस कार्य के लिए एनटीपीसी के अधिकारियों द्वारा सहमति प्रदान की गई।



इसके अतिरिक्त, आरक्षित क्षेत्र से कुछ दूरी पर बह रही नदी के निकट पंपिंग स्टेशन स्थापित कर कैनाल के माध्यम से आरक्षित क्षेत्र तक पानी पहुंचाने की संभावनाओं का सर्वे कराने तथा उपयुक्त प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए। सर्वे के उपरांत प्रस्ताव व्यवहार्य पाए जाने पर लघु सिंचाई विभाग के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी।


मृगों के लिए पर्याप्त एवं प्राकृतिक आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करने के दृष्टिगत मनरेगा के माध्यम से क्षेत्र में ग्रीन नर्सरी विकसित करने के निर्देश दिए गए। इसमें स्थानीय परिस्थितियों एवं कृष्ण मृगों के प्राकृतिक आहार के अनुरूप वनस्पतियों के विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।


पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के संबंध में मंडलायुक्त ने पर्यटन विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे इको पार्क में मिट्टी एवं खपरैल से निर्मित हट्स विकसित करने तथा प्राकृतिक परिवेश को यथासंभव संरक्षित रखते हुए आगंतुकों को प्रकृति के निकट होने का अनुभव प्रदान करने वाली व्यवस्थाएं विकसित करने के निर्देश दिए। पर्यटन विभाग को इको पार्क में आवश्यक मूलभूत एवं पर्यटक सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा गया।


वहीं, वन विभाग द्वारा क्षेत्र में वॉच टावर विकसित किए जाएंगे, जिससे कृष्ण मृगों के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को उनके प्राकृतिक आवास एवं विचरण क्षेत्र का अवलोकन करने का अवसर भी प्राप्त हो सके।

प्रमुख निर्देश एवं कार्ययोजना:

भूमि चिन्हांकन व बाउंड्री निर्माण: आरक्षित क्षेत्र की शेष भूमि का डी-मार्केशन (सीमांकन) कराकर इसे स्पष्ट करने तथा वन विभाग को सुरक्षित हस्तांतरण के साथ सुदृढ़ बाउंड्री वॉल के निर्माण के निर्देश दिए गए।


निवासियों का पुनर्वास: आरक्षित क्षेत्र में रह रहे परिवारों को एक स्थान पर आवासीय कॉलोनी के रूप में बसाने और 'मुख्यमंत्री आवासीय योजना' के तहत पात्र परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने के लिए सीडीओ को निर्देशित किया गया।


जल प्रबंधन व NTPC का सहयोग: कृष्ण मृगों के लिए वर्षभर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु एनटीपीसी (NTPC) के CSR फंड से सोलर पंप आधारित ब्लास्ट वेल विकसित कर छोटे तालाब और बंधियाँ बनाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त, पास की नदी से पंपिंग स्टेशन व कैनाल के जरिए पानी लाने की संभावनाओं का सर्वे कराने के निर्देश दिए गए।


हरियाली व ग्रीन नर्सरी: मनरेगा के माध्यम से क्षेत्र में ग्रीन नर्सरी विकसित की जाएगी, जिसमें कृष्ण मृगों के प्राकृतिक आहार के अनुकूल स्थानीय वनस्पतियों व पौधों का रोपण होगा। वर्षा जल संचयन पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

ईको-टूरिज्म व वॉच टावर: पर्यटन विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे ईको पार्क में मिट्टी और खपरैल से निर्मित प्राकृतिक हट्स (Huts) बनाई जाएंगी। वहीं, वन विभाग द्वारा वॉच टावर का निर्माण किया जाएगा, जिससे पर्यटक प्राकृतिक परिवेश में कृष्ण मृगों के विचरण का अवलोकन कर सकेंगे।


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