खेल आधारित शिक्षण से बढ़ेगा आत्मविश्वास और रचनात्मकता: महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी
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खेल आधारित शिक्षण से बढ़ेगा आत्मविश्वास और रचनात्मकता: महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी


लखनऊ, 25 मार्च 2026।

योगी सरकार द्वारा प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल के रूप में ‘बालवाटिका नवारंभ उत्सव’ का प्रदेशभर के बालवाटिका (को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्र) युक्त विद्यालयों में भव्य एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम ने नन्हें बच्चों के शैक्षिक जीवन की सहज, आनंददायक एवं प्रेरक शुरुआत को सुनिश्चित किया।


कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत विकासखंड सरोजनीनगर के ग्राम रामचौरा स्थित प्राथमिक विद्यालय से अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा तथा महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा संयुक्त रूप से की गई। इस दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह और उमंग का वातावरण देखने को मिला, जहां नन्हें बच्चों ने खेल-खेल में सीखने की प्रक्रिया को अपनाया।



अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण शिक्षण चरण होता है। ‘नवारंभ उत्सव’ का उद्देश्य प्रत्येक बालक-बालिका को प्रारंभिक अवस्था से ही विद्यालय से जोड़ना है, ताकि वे नियमित रूप से शिक्षा ग्रहण करें और आगे की कक्षाओं में सहज रूप से प्रगति कर सकें। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता 3 वर्ष से 18 वर्ष तक प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। बच्चों को विद्यालय की ओर आकर्षित करने के लिए रोचक एवं गतिविधि आधारित शिक्षण वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिससे बच्चे स्वयं विद्यालय आने के लिए प्रेरित हों।



महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि खेल आधारित शिक्षण, स्व-अधिगम एवं सक्रिय अधिगम की पद्धतियों के माध्यम से बच्चों के समग्र विकास, जिज्ञासा और रचनात्मकता को प्रारंभिक स्तर से ही सशक्त किया जा रहा है। ‘सेल्फ लर्निंग’ और ‘एक्टिव लर्निंग’ के जरिए बच्चों में आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और रचनात्मक सोच का विकास हो रहा है।



नवारंभ उत्सव का प्रमुख आकर्षण ‘रेत पर लेखन’ गतिविधि रही, जिसमें 3 से 4 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों ने खेल-खेल में अक्षरों और अंकों का ज्ञान प्राप्त किया। इस नवाचारी पद्धति ने सीखने की प्रक्रिया को सरल, रोचक और आनंदमय बना दिया, जिससे बच्चों में शिक्षा के प्रति स्वाभाविक रुचि विकसित हुई।



कार्यक्रम के दौरान 58 बच्चों को गिफ्ट हैंपर वितरित किए गए, जिनमें शैक्षिक सामग्री एवं उपयोगी वस्तुएं शामिल थीं। अपर मुख्य सचिव द्वारा स्वयं बच्चों को उपहार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। साथ ही नवीन शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए पाठ्यपुस्तक वितरण का शुभारंभ भी किया गया, जिसके अंतर्गत 25 बच्चों को पाठ्यपुस्तकें प्रदान की गईं।



इस उत्सव के माध्यम से 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के नामांकन को बढ़ावा देने तथा 6 वर्ष पूर्ण कर चुके बच्चों के कक्षा 1 में प्रवेश को सरल, सहज एवं आकर्षक बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। विद्यालयों में प्रिंट-समृद्ध वातावरण, लर्निंग कॉर्नर एवं विविध शिक्षण सामग्री के माध्यम से बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित किया जा रहा है।



कार्यक्रम में अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे बाल शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण का निर्माण हुआ। यह पहल न केवल बच्चों के शैक्षिक जीवन की मजबूत शुरुआत का आधार बनी, बल्कि विद्यालय, अभिभावक और समुदाय के बीच समन्वय को भी नई दिशा प्रदान कर रही है।

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