मंडल में कृषि निर्यात संवर्धन हेतु बहुआयामी कार्ययोजना पर मंथन, प्रशिक्षण, समन्वय एवं विपणन सुदृढ़ करने के निर्देश
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मंडल में कृषि निर्यात संवर्धन हेतु बहुआयामी कार्ययोजना पर मंथन, प्रशिक्षण, समन्वय एवं विपणन सुदृढ़ करने के निर्देश

 


मंडल में कृषि निर्यात संवर्धन हेतु बहुआयामी कार्ययोजना पर मंथन, प्रशिक्षण, समन्वय एवं विपणन सुदृढ़ करने के निर्देश


मंडलायुक्त श्रीमती सौम्या अग्रवाल की अध्यक्षता तथा सभी संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में कार्यालय स्थित गांधी सभागार में मंडल स्तरीय कृषि निर्यात निगरानी समिति की बैठक संपन्न हुई, जिसमें मंडल में कृषि निर्यात को बढ़ाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।


सर्वप्रथम मंडल के कृषि उत्पादों की निर्यात स्थिति एवं आंकड़ों की जानकारी लेते हुए मंडलायुक्त ने समस्त कृषक उत्पादक संगठनों एवं कृषक उत्पादक कंपनियों सहित सभी हितधारकों को लाख की खेती (जो मंडल स्तरीय कृषकों के लिए अत्यंत लाभकारी हो सकती है) का व्यापक प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिए। इसी क्रम में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपिडा) के सहयोग से क्रेता-विक्रेता बैठकें आयोजित कराने तथा इन कार्यों में तकनीकी सहयोग हेतु शोध संस्थानों का चिन्हांकन कर उनसे समन्वय स्थापित करने को भी कहा गया।


उन्होंने स्पष्ट किया कि जनपद स्तर पर वास्तविक हितधारकों के मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए सुदृढ़ संवाद व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है, जिससे उन्हें प्रोत्साहन मिल सके। मंडल स्तर पर नीतिगत निर्णय लेकर उन्हें शासन को अग्रेतर कार्रवाई हेतु प्रेषित किए जाने के निर्देश भी दिए गए।


निर्यातकों एवं कृषकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। साथ ही भारतीय डाक विभाग द्वारा संचालित डाक निर्यात कार्यक्रम को अधिकाधिक हितधारकों तक पहुंचाने, मंडल के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष निर्यातकों का चिन्हांकन कर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में प्रतिभाग कराने, फल प्रसंस्करण विभाग से जैविक उत्पादों के विपणन से जुड़े उत्पादकों की सूची प्राप्त करने तथा नगर क्षेत्र में जैविक उत्पादों के विपणन हेतु उपयुक्त स्थान चिन्हित करने के निर्देश भी दिए गए।


मंडल के समस्त डायरेक्ट निर्यातकों के साथ बैठक आयोजित कर मंडल के निर्यात योग्य उत्पादों की स्थिति की सम्यक जानकारी प्राप्त करने, विगत दो वर्षों से निर्यात न करने वाले निर्यातकों से संपर्क कर कारण स्पष्ट करने तथा कृषि निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त करने वाले निर्यातकों एवं कृषक उत्पादक संगठनों की गतिविधियों का समाचार पत्रों के माध्यम से प्रचार-प्रसार कराने के भी निर्देश दिए गए।


बैठक में कृषि विपणन अधिकारी, प्रयागराज मंडल, डॉ दिनेश चंद्र द्वारा बताया गया कि प्रतापगढ़ से आंवला एवं फतेहपुर से केला क्लस्टर बन गया है तथा फतेहपुर से आलू, हरी मिर्च एवं कौशांबी से केला क्लस्टर बनवाया जा रहा है। प्रतापगढ़ से आंवला के 208 तथा प्रयागराज से सुरखा अमरूद के 144 अधिकृत उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं। सोनाचूर और विष्णुभोग चावल केसरिया नींबू कजला खरबूजा रामराज धान एवं फतेहपुर सूतफानी जी0आई0 पंजीकरण हेतु चयनित है तथा पंजीकरण की कार्यवाही जा रही है।


बैठक में मण्डल स्तरीय कृषि निर्यात निगरानी समिति के सदस्य सचिव डा0 दिनेश चन्द्र सहायक कृषि विपणन अधिकारी द्वारा कृषि निर्यात नीति के सम्बंध मे विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि कृषि निर्यात नीति-2024 के अर्न्तगत अनुमन्य प्रोत्साहन लाभ विशेष रूप से निर्यात क्लस्टर मे अच्छी कृषि पद्धतियो अथवा समकक्ष प्रमाणीकरण हेतु व्यय का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 1.50 लाख प्रतिवर्ष की व्यय प्रतिपूर्ति किया जाना प्राविधानित है, इसके साथ ही जैविक, प्राकृतिक, समकक्ष प्रमाणीकरण हेतु कुल व्यय का 50 प्रतिशत अथवा एक वित्तीय वर्ष मे रू0 01 लाख की अधिकतम सीमा मे प्रतिपूर्ति की जायेगी इसके अतिरिक्त कृषि व कृषि प्रसंस्कृत उत्पाद के नमूनो का आयातक देशों के एम0आर0एल0 मानको के अनुसार परीक्षण हेतु कुल व्यय का 50 प्रतिषत अथवा एक वित्तीय वर्ष मे अधिकतम 01 लाख रूपये की ब्यय प्रतिपूर्ति किये जाने का प्राविधान किया गया है।


         मण्डलायुक्त ने किसानो को कृषि निर्यात नीति से किस प्रकार अधिक लाभान्वित किया जाये, इसके बारे में जानकारी ली, जिसपर सहायक कृषि विपणन अधिकारी ने बताया कि किसान कृषि जिन्सों के क्लस्टर निर्माण कराते हुए मौलिक कृषि, कृषि उत्पादो का प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, ब्रान्डिंग, पैकेजिंग एवं लेबिलिंग आदि कराते हुए निर्यात कर लाभान्वित हो सकते है। कृषि विपणन अधिकारी ने बताया कि प्रतापगढ़ से आंवला क्लस्टर फतेहपुर से केला क्लस्टर बन गया है तथा फतेहपुर से आलू हरी मिर्च एवं कौशांबी से केला क्लस्टर बनवाया जा रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में आंवला एवं उसके प्रसंस्कृत उत्पाद का निर्यात 22.512 मै0टन (मूल्य 0.33 करोड), गाजर /ताज़ी हरी सब्जी निर्यात 55.1 मै0टन (मूल्य 0.135 करोड), भिन्डी निर्यात 31.0 मै0टन (मूल्य 0.009 करोड),चावल निर्यात 17618.9 मै0टन (मूल्य 61.01 करोड), मूंगफली निर्यात 398.0 मै0टन (मूल्य 2.92 करोड) रहा है तथा कुल निर्यात18125.472 मै0टन (मूल्य 73.13 करोड), जबकि विगत वित्तीय वर्ष 2024 -25 में कुल निर्यात 6296.65 मै0टन (मूल्य 26.54 करोड) रहा।


      सहायक कृषि विपणन अधिकारी द्वारा बताया गया कि कृषि निर्यात एवं डॉक्यूमेंटेशन प्रक्रिया के बारे में मण्डल के चार कृषक उत्पादक संगठन एवं दो अधिकारियों/ कर्मचारियों को National Institute Of Plant Health Management (NIPHM) Hyderabad से प्रशिक्षण दिलाया गया। बैठक मे उपस्थित जिला विकास प्रबंधक नाबार्ड श्री अनिल शर्मा द्वारा अवगत कराया गया कि कौशांबी जनपद के आईफा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी द्वारा केला के प्रसंस्कृत उत्पाद एवं हैंडीक्राफ्ट का निर्यात किया जा रहा है और इस क्षेत्र में केले की खेती बहुतायत होती है अतः निर्यातकों को विशेष प्रशिक्षण देते हुए संभावनाएं तलाशी जा सकती है।


बैठक में डॉ. दिनेश चंद्र, सहायक कृषि विपणन अधिकारी; श्री अनिल शर्मा, जिला विकास प्रबंधक, राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक; श्री अजय चौरसिया, संयुक्त आयुक्त उद्योग; श्री पवन विश्वकर्मा, उप कृषि निदेशक; डॉ. बी.के. द्विवेदी, गो बायो वेद शोध संस्थान; श्री सुशील कुमार तिवारी, प्रयागराज डाकघर; तथा प्रोफेसर नीलम यादव, खाद्य प्रौद्योगिकी केंद्र, राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला, इलाहाबाद विश्वविद्यालय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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