परसपुर/गोंडा। दीनदयाल शोध संस्थान, लाल बहादुर शास्त्री कृषि विज्ञान केंद्र, गोंडा में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत संचालित सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान स्वामी विवेकानंद जयंती गरिमामय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्कृष्ट सहभागिता करने वाले सीआरपी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक डॉ. प्रेम कुमार ठाकुर ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार किसानों एवं युवाओं के लिए आज भी प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने आत्मनिर्भरता, निरंतर परिश्रम तथा प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर खेती करने को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सी.एम. त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद का दर्शन प्राकृतिक खेती की मूल भावना से गहराई से जुड़ा हुआ है, जो सतत कृषि, मृदा संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ करता है। प्रशिक्षण सत्र के दौरान गृह विज्ञान विशेषज्ञ श्रीमती ममता त्रिपाठी, अभियंता वैज्ञानिक मिथलेश कुमार झा, पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. आशीष पांडेय, पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक मिश्रा तथा प्रसार वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु ने प्राकृतिक खेती एवं प्रशिक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक मिश्रा ने जानकारी दी कि 19 से 21 जनवरी तक पशु चॉकलेट निर्माण विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिससे पशुपालकों को आयवर्धन के नए अवसर प्राप्त होंगे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यक्रम सहायक हरिपाल सिंह एवं श्रीमती शशि बाला सिंह का सराहनीय योगदान रहा। जनपद के तकनीकी सहायक अरुण सोनी की उपस्थिति में 20 सीआरपी एवं 25 किसानों ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की, जिनमें वीरेंद्र कुमार सिंह, कृष्ण प्रकाश सिंह, जोगिंदर सिंह, विक्रम यादव एवं दुर्गेश कुमार सिंह प्रमुख रूप से शामिल रहे। कार्यक्रम के समापन पर स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को आत्मसात कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया।
