प्रदीप बच्चन (ब्यूरो चीफ)
बलिया/वाराणसी (यूपी) बच्चों को पहले दिन जो भाषा सुनाई पड़ती हैं।वह हिंदी है। घर वाले चाहें अंग्रेजी थोपने की कोशिश करें, पर बच्चों का माहौल तो हिंदी का ही मिलता है। गड़बड़ होती है स्कूल जाने पर। पत्रकार व वरिष्ठ साहित्यकार प्राची राय ने दूरभाष से जानकारी देते हुए हमारे वरिष्ठ संवाददाता-प्रदीप बच्चन को बताया कि आज तो यह तय मान लिया गया है कि अंग्रेजी स्कूल में पढे बिना जिंदगी बेकार है। माहौल हिंदी का है पढ़ते अंग्रेजी है और इस चक्कर में ना तो अच्छी तरह से हिंदी आती और न अंग्रेजी मतलब जब किसी के जबरदस्ती कपड़े पहनेंगे तो कहीं वे कपड़े ढीले होंगे, कहीं फसेंगे। ऐसे मे परेशानी तो होगी ही। यह समस्या सिर्फ भारत में ही है, कि यहां लोंगो को यह कहना पड़ रहा है कि अपने देश की भाषा का इस्तेमाल करो, दुनिया में कोई भी देश ऐसे मुश्किल से नहीं जूझ रहा है जो अपनत्व, जो आत्म विश्वास और जो सम्मान अपनी भाषा दिला सकती है वह उधर की भाषा से संभव नहीं है। ये वक्तव्य महिला भूमिहार समाज की महिलाओ ने राष्ट्र भाषा के रुप मे हिन्दी की स्थिति को लेकर होटल नैवेधम महमूरगंज मे एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया। जिसमे उपस्थित महिलाओ ने हिन्दी की स्थिति,महत्व और हिन्दी को बढावा देने के लिए क्या करना चाहिए, इस विषय पर अपने विचार को रखा। इस गोष्ठी में डॉ०राजलक्ष्मी राय, पूनम सिंह, किरन सिंह, डा विजेयता राय,वंदना सिंह,प्राची राय,कुसुम राय,सीमा राय, नीलिमा राय, सुमन राय,वीना सिंह, सोनी,ऋतु स्वपनिल,किरन राय, उमा, रश्मि, कुसुम,प्रिया राय, रंजना, अनीता, प्रतिमा,जोशी राय,सरोज,साध्वी,अंशु इत्यादि महिलाएं मौजूद रही।
अंत मे आये हुए अतिथिगण का आभार महिला भूमिहार समाज की संस्थापिका डा राजलक्ष्मी राय ने दिया और बताया कि 5 अक्टूबर को मदीन होटल कैटोमेंट मे माता की चौकी और गरबा का आयोजन किया गया है।
