वाराणसी: संतान की कामना से देश भर के राज्य और पूर्वांचल से आए श्रद्धालुओं ने लोलार्क कुंड में डुबकी लगानी शुरू कर दी। शाम छह बजे के बाद षष्ठी तिथि लगते ही बैरिकेडिंग में भीड़ का दबाव भी बढ़ने लगा। श्रद्धालुओं की कतार शिवाला से सोनारपुरा चौराहे के आगे तक निकल चुकी थी। स्नान के 48 घंटे पहले ही श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होना शुरू कर दिया था। गुरुवार की रात से ही लोलार्क कुंड में षष्ठी का स्नान शुरू हो गया। पांच किलोमीटर लंबी बैरिकेडिंग में कतारबद्ध श्रद्धालु गलियों से होते हुए लोलार्क कुंड में पहुंचने लगे।
भीड़ का दबाव होने के कारण भदैनी और अस्सी क्षेत्र की गलियों में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने चूल्हा भी लगा लिया था। सुबह से चूल्हे पर भोजन और प्रसाद बनना शुरू हो गया। बाढ़ के कारण घाटों पर जगह नहीं होने के कारण गली और ऊपर वाले स्थान पर श्रद्धालुओं ने स्थान घेर लिया था। जगह-जगह लोग चूल्हा जला रहे थे तो वहीं सड़क किनारे ही आराम भी करते नजर आ रहे थे। शाम ढलने के साथ ही लोलार्क कुंड की ओर जाने वाली बैरिकेडिंग में श्रद्धालुओं की कतार लंबी होती चली गई।
संतान की कामना
आधी रात को लोलार्केश्वर महादेव की आरती के बाद जैसे ही लोलार्क कुंड का फाटक आम श्रद्धालुओं के लिए खुला तो भीड़ का दबाव तेजी से आगे बढ़ा। दंपती एक दूसरे का हाथ थामे हुए कुंड की ओर बढ़ रहे थे। कुंड की सीढि़यों से नीचे उतरने के बाद उन्होंने तीन डुबकियां लगाईं।
एक फल या सब्जी के साथ ही पहने हुए वस्त्र और आभूषण का त्याग किया। इसके बाद लौट गए। स्नान का यह सिलसिला शुक्रवार की देर रात तक चलता रहेगा। मंदिर के पुजारी रमेश पांडेय ने बताया कि संतान की कामना से श्रद्धालुओं देश भर से लोलार्क कुंड में स्नान के लिए आते हैं। इस बार डेढ़ से दो लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।