मेजा: सद्भावना कायम करने में महिला प्रधानों और उपविजेता प्रधानों ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी
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मेजा: सद्भावना कायम करने में महिला प्रधानों और उपविजेता प्रधानों ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी

सद्भावना ग्राम योजना: मेजा विकास खण्ड में हुई बैठक

मेजा: सद्भावना कायम करने में महिला प्रधानों और उपविजेता प्रधानों ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी

हारे और जीते प्रधानों को एक मंच पर लाकर विकास कार्यों में योजित करने के लिए सद्भावना ग्राम योजना की संकल्पना पूर्व वरिष्ठ आई.ए.एस. तथा पूर्व मण्डलायुक्त, झाँसी मण्डल, झाँसी डाॅ. अजय शंकर पाण्डेय द्वारा की गई है। इसी कड़ी में आज मेजा विकास खण्ड में पराजित और विजयी प्रधानों के साथ अलग-अलग बैठकें की गई। मेजा विकास खण्ड में 75 ग्राम पंचायतें है, जिनमें से करीब 80 प्रतिषत पंचायतों के प्रधान एवं उपविजेता प्रधानों द्वारा प्रतिभाग किया गया। सबसे सुखद बात आज की बैठक की यह रही कि महिला प्रधानों और उपविजेता महिला प्रधानों ने सद्भावना ग्राम योजना को स्वीकार करने में अति उत्साह प्रदर्षित किया। यह मान्यता है कि महिलाओं के बीच में एकता कायम करना और उन्हें एकमत करना काफी कठिन होता है परन्तु आज की इस बैठक में यह मान्यता पर पूर्णतः गलत साबित हुई। महिला प्रधानों एवं उपविजेता प्रधानों ने जहाँ बैठक में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया वहीं एक-दूसरे को गले लगाकर, सारे विवादों को समाप्त कर गाँव में सद्भावना और शान्ति कायम करने में विषेष पहल की।  
सद्भावना ग्राम योजना के बारे में डाॅ. पाण्डेय ने बताया कि इस योजना में निर्वाचित प्रधान कुषल प्रधान और पराजित प्रधान विकास सलाहकार की भूमिका निभाएंगे। निर्वाचित प्रधान भविष्य में अपने प्रतिद्वन्दी का परिचय अपराजित प्रधान के रुप में नहीं बल्कि विकास सलाहकार के रुप में करायेंगे, क्योंकि पराजित शब्द नकारात्मक है। इस योजना के माध्यम से निर्वाचित प्रधान और चुनाव में प्रतिभाग करने वाले प्रतिद्वन्दी उम्मीदवार परस्पर एकजुट होकर गाँव के विकास में सहयोगी बनेंगे। सद्भावना ग्राम योजना के अन्तर्गत आने वाले गाँव के विकास कार्यों को प्रषासनिक स्तर पर प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। इस योजना का क्रियान्वयन 3 चरणों में किया जाएगा जिसमें पहले चरण में निर्वाचित प्रधान के साथ बैठक, दूसरे चरण में पराजित प्रधान के साथ बैठक और तीसरे व अन्तिम चरण में निर्वाचित व पराजित प्रधान के साथ बैठक कर योजना के बारे बताया जाएगा।

मेजा विकास खण्ड में हुई सद्भावना ग्राम योजना की इस बैठक में महिला प्रधानों और उपविजेता महिला प्रधानों की बची बनी सहमति काफी चर्चा का विषय बनी रही। महिला प्रधानों और उपविजेता महिला प्रधानों ने अपने पुरुष सहयोगियों की तुलना में योजना की बारीकियों को समझने में खूब दिलचस्पी भी दिखाई। सभी ने इस योजना को अभूतपूर्व एवं अनूठी पहल बताते हुए पूर्ण समर्थन करने का आष्वासन दिया। श्रीमती सुषील देवी प्रधान भदावा ने बताया कि पहली बार इस प्रकार की योजना के क्रियान्वयन का अवसर उन्हें मिल रहा है। वे पूर्ण रुप से इस योजना का लागू करेंगी और उपविजेता प्रधान के साथ मिलकर गाँव के विकास में सहयोग करेंगी। साथ ही उपविजेता प्रधान को विकास सलाहकार के नाम से सम्बोन्धित किया जाएगा तो अवष्य वे भी अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगी। सद्भावना ग्राम योजना की इस बैठक में डाॅ. अजय शंकर पाण्डेय, पूर्व वरिष्ठ आई.ए.एस. तथा पूर्व मण्डलायुक्त, झाँसी मण्डल, झाँसी, बी.डी.ओ. मेजा श्री सईद अहमद, ए.डी.ओ.पी. श्री सुदामा राम, श्रीमती ललिता सिंह प्रधान अमोरा, श्रीमती सुषीला देवी प्रधान भदावा, श्रीमती कविता प्रधान घोराहा, श्रीमती अनिता देवी प्रधान हरगढ़, श्रीमती नीलम तिवारी प्रधान लखनपुर, श्रीमती सावित्री देवी प्रधान मेजा खास, श्रीमती सुराज देवी प्रधान सिलौधी कलां उपस्थित रहे। साथ इन्हीं ग्राम पंचायत की महिला उपविजेता प्रधान श्रीमती सुमन सिंह, श्रीमती निर्मला उपाध्याय, श्रीमती ललिता देवी, श्रीमती सुषीला देवी आदि भी उपस्थित रही।

ऐसे कायम होगी सद्भावना
लक्ष्य
● निर्वाचित प्रधान और उपविजेता प्रधान को योजना के माध्यम से परस्पर सहयोगी बनाकर गाँव के विकास में एकजुट होकर कार्य करने के लिए प्रेरित करना।
● निर्वाचित प्रधान को कुषल प्रधान तथा पराजित प्रधान को विकास सलाहकार की उपाधि / सम्बोधन से सम्मानित करना।

इंसेन्टिव
● सद्भावना ग्राम के प्रधानों को अधिकारियों के कार्यालयों में मिलने में वरीयता दी जायेगी तथा उनके आवेदन पत्र पर सभी विभागों को त्वरित गति से कार्यवाही करनी होगी।
● सद्भावना ग्राम के जो लेटर हेड पर दिये गए आवेदन तभी मान्य होगा, जब कुषल प्रधान और विकास सलाहकार के संयुक्त हस्ताक्षर होंगे।
● सद्भावना ग्राम के संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त पत्र पर कार्यवाही हेतु प्रधानों को कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। सद्भावना ग्राम के संयुक्त हस्ताक्षर वाले पत्र को ग्राम विकास अधिकारी प्राप्त करेंगे और उनके अनुश्रवण की पूरी जिम्मेदारी खण्ड विकास अधिकारी की होगी, जो उसकी प्रगति से उन्हें अवगत करायेंगे। इस हेतु ग्राम में पृथक रजिस्टर बनाएं जायेंगे तथा यही व्यवस्था विकास खण्ड स्तर पर भी होगी।

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