इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शृंगार गौरी सहित अन्य देवी-देवताओं की नियमित पूजा की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर आए फैसले में कई अहम टिप्पणियां की हैं। कोर्ट ने अपने 65 पेज के आदेश में कहा है कि शृंगार गौरी, भगवान गणेश, भगवान हनुमान की पूजा करने से मस्जिद के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं होगा। इसके साथ स्थानीय प्रशासन या सरकार कुछ ऐसा उपबंध कर सकती है, जिससे हिंदू भक्त नियमित पूजा कर सकते हैं, जिसका कि कानून से कोई मतलब नहीं होगा।
कोर्ट ने राखी सिंह व चार अन्य की याचिका पर कहा कि याचियों की ओर से वाराणसी कोर्ट के समक्ष दाखिल याचिका में मंदिर की बाहरी दीवार पर मां शृंगार गौरी और अन्य देवी-देवताओं की पूजा करने का अधिकार मांगा गया है। याचिका में मस्जिद परिसर में किसी बदलाव की बात नहीं है या इसके स्वरूप में परिवर्तन करने की बात नहीं है। इसलिए, पूरे वर्ष देवी और देवताओं की पूजा करने के अधिकार को लागू करने पर पूजा स्थल अधिनियम के तहत रोक नहीं लगती है। अंजुमने इंतजामिया मसाजिद कमेटी की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की पीठ ने कहा कि यह याचिका पूजा के अस्तित्व के अधिकार को लागू करने की मांग करती है। जिसका प्रयोग हिंदू भक्त 15 अगस्त 1947 के बाद से कर रहे हैं। यह 1993 तक किया जा रहा था। उसके बाद यह पूजा साल भर में एक दिन के लिए हो गई।
मामले में कोर्ट ने अंजुमने इंतजामिया मसाजिद कमेटी की आपत्तियों को भी नहीं माना कि हिंदू पक्ष जो मांग कर रहे हैं, वह एक धार्मिक सामुदायिक अधिकार है। इसके बजाय यह उनके व्यक्तिगत अधिकार से जुड़ा हुआ भी मामला है। कोर्ट ने कहा कि हिंदू भक्तों में से कोई भी व्यक्ति, जिसे किसी भी दिन पूजा के अधिकार से वंचित किया जाता है, उस दिन कार्रवाई शुरू करने का अधिकार होगा।