प्रयागराज: भारतीय संविधान और डॉ भीमराव अम्बेडकर" विषयक विचार गोष्ठी का किया गया आयोजन
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प्रयागराज: भारतीय संविधान और डॉ भीमराव अम्बेडकर" विषयक विचार गोष्ठी का किया गया आयोजन

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प्रयागराज(ए पी सिंह): क्षेत्रीय अभिलेखागार, क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई एवं राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय द्वारा "भारतीय संविधान और डॉ भीमराव अम्बेडकर" विषयक विचार गोष्ठी का किया गया आयोजन 
आजादी का अमृत महोत्सव आयोजन की श्रृंखला में बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर की 131वीं जयंती के अवसर पर संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थापित क्षेत्रीय अभिलेखागार, क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई एवं राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय द्वारा "भारतीय संविधान और डॉ भीमराव अम्बेडकर"विषयक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सर्वप्रथम उनको नमन करते हुए बाबासाहेब के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम के अतिथियों के अतिरिक्त शामिल विभिन्न विद्वानों एवं विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। गोष्ठी का शुभारंभ पांडुलिपि अधिकारी श्री गुलाम सरवर ,पुरातत्व अधिकारी श्री राम नरेश पाल एवं विभागीय कर्मचारियों द्वारा अतिथियों को पुष्प गुच्छ से स्वागत के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यापक, अधिवक्ता एवं समाजसेवी श्री चंद्रबली पटेल ने की। मुख्य अतिथि डॉ गोपाल मोहन शुक्ल के अतिरिक्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय के स्थायी अधिवक्ता श्री लेखराज पटेल, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अशोक कुमार त्रिपाठी, मुनेद्र नाथ चौबे ने अपने विचार व्यक्त किए। केंद्रीय विद्यालय झलवा, प्रयागराज की प्रवक्ता सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ नीलिमा मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त किए साथ ही डॉ भीमराव अम्बेडकर की शान में कविता तथा कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत की।
 मुख्य अतिथि डॉ गोपाल मोहन शुक्ल ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ अम्बेडकर के तत्कालीन राजनैतिक जनों से वैचारिक मतभेद होने के बावजूद आपसी सद्भाव एवं भाईचारा बना रहता था, मुख्य वक्ता श्री लेखराज पटेल ने अपनी बात रखते हुए संविधान पर विस्तृत चर्चा की। मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्व पर अम्बेडकर के विचार से श्रोताओं को लाभान्वित किया। सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ नीलिमा मिश्रा ने डॉ अम्बेडकर द्वारा महिलाओं को दिए गए अधिकार की सराहना की। महिला आज यदि पुरुषों से कंधा मिलाकर एक साथ खड़ी है तो यह बाबासाहेब की ही देन है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री चंद्रबली पटेल ने कहा कि संविधान को राष्ट्रीय ग्रंथ मानते हुए सभी को अपने घरों में रखना चाहिए। पांडुलिपि अधिकारी श्री गुलाम सरवर ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों को धन्यवाद धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।इस अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों में अधिवक्ता उच्च न्यायालय श्री अशोक कुमार त्रिपाठी, स्थाई अधिवक्ता श्री अश्विनी कुमार त्रिपाठी, श्री ओम प्रकाश एवं भाजपा पिछड़ा वर्ग काशी प्रांत के क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री अश्विनी कुमार पटेल आदि बहुसंख्य जनों ने गोष्ठी का लाभ उठाया।

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