प्रयागराज: गर्मी का मौसम है। वातावरण में धीरे-धीरे गर्मी और भी बढ़ रही है। किसी घर रखा दूध फट रहा है तो कहीं कुछ ही घंटों में खाना बेस्वाद और गंध वाला हो जा रहा है। पानी को लेकर भी सतर्क रहना होगा क्योंकि यही डायरिया का मुख्य कारण बनता है। अस्पतालों में डायरिया के रोगियों में अचानक वृद्धि हो गई है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है। डायरिया का इलाज समय न हुआ तो यह जानलेवा भी हो सकता है। अस्पतालों में बन रहे हालात चिंताजनक हैं। डायरिया का प्रमुख कारण है पानी में गंदगी, फल और सब्जियों में जमी धूल और बासी खाना। पानी घर में खुला हुआ रखने से उस पर धूल के कण पड़ते रहते हैं। बड़े बुजुर्ग और बच्चे भी अनजाने में वही पानी पी लेते हैं और गंदगी पेट के भीतर जाकर संक्रमण फैला देती है। इससे पाचन तंत्र में विकार उत्पन्न हो जाता है।
घरों में आजकल पीने वाला पानी उबालकर और उसे ढंक कर ही रखें। बच्चों के लिए पानी पर विशेष ध्यान दें, उनके लिए किसी बोतल में उबला हुआ पानी अलग से रख सकते हैं ताकि दूषित पानी से उन्हें सुरक्षित रखा जा सके।
डायरिया के लक्षण
-पेट में मरोड़ महसूस होना
-जल्दी-जल्दी दस्त होना
-जी मिचलाना
-बुखार
-मल में खून आना।
बच्चों में देखें यह लक्षण तो हो जाएं सतर्क
पेशाब कम होना, मुंह सूखना, सिर दर्द, थकान, बुखार, चिड़चिड़ापन, सुस्ती, अधिक नींद आना।
प्रदूषित पानी से बिगड़ सकती है सेहत : डाक्टर मनीषा
शिशु रोग विशेषज्ञ डा. मनीषा मौर्या कहती हैं कि गर्मी के दिनों में पानी से सजगता सबसे महत्वपूर्ण सावधानी है। पानी ही लोगों की सेहत बिगाड़ देता है। डायरिया हो या फिर अन्य संचारी रोग। संक्रमण पानी से अधिक फैलता है। सावधानी यह बरतनी है कि पानी उबला हुआ ही पिएं, घर में इन दिनों ओआरएस का घोल जरूर रखें।
