खतरे में चौथा स्तम्भ पत्रकारों को विशेष सुरक्षा व अधिकार दिए जाने की प्रबल आवश्यकता - अजय कुमार मांझी ,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष , भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा समिति
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खतरे में चौथा स्तम्भ पत्रकारों को विशेष सुरक्षा व अधिकार दिए जाने की प्रबल आवश्यकता - अजय कुमार मांझी ,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष , भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा समिति




मनोज तिवारी ब्यूरो रिपोर्ट अयोध्या

अयोध्या: अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन धर्म नगरी अयोध्या ,भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार मांझी ने कहा खतरे में चौथा स्तंभ पत्रकारों को विशेष सुरक्षा का अधिकार दिए जाने की प्रबल आवश्यकता है सम्पूर्ण देश में चौथा स्तम्भ खतरे में पड़ता दिख रहा है,आज के इस आपराधिक जमाने में पत्रकारों को विशेष सुरक्षा के साथ साथ विषेशाधिकार की भी आवश्यकता बन गई है पत्रकारों पर आए दिन हमले हो रहे हैं आज मीडिया से जुड़ा कोई भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं है। चाहे वह किसी छोटे बडे अखबार का रिपोर्टर हो या किसी टीवी चैनल का या फिर किसी पोर्टल यूट्यूब चैनल का। इसलिए भारत सरकार को पत्रकारों के हित में अलग से कानून बनाना चाहिए। जिसके तहत मीडिया से जुड़े सभी लोगों को विशेष सुरक्षा व समाचार संकलन के लिए भी विशेषाधिकार मिल सके। *पत्रकारिता करना देश और समाज सेवा की श्रेणी में आता है जब ऐसे देश सेवक सुरक्षित रहेंगे तभी देश सुरक्षित रहेगा। कलमकारों का सबसे बड़ा गुनाह है सच लिखना। और सच लिखने के कारण जहां विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी कर्मचारी इनसे नाराज हो जाते हैं वहीं अवैध कारोबारी और भूमाफिया व नेता भी पत्रकारों के दुश्मन बन जाते हैं कुछ चमचेबाज पत्रकारों को छोड़ दें तो सच लिखने वाले कलम के सिपाहियों के कदम कदम पर दुश्मन मौजूद हैं। कहीं इन सिपहसालारों पर फर्जी मुकदमे ठोंके जाते हैं तो कहीं सीधे मौत के मुंह में धकेल दिए जाते हैं। नेता भी तब तक पत्रकारों का सम्मान करते हैं जब तक नेतागिरी चमक नहीं जाती। पत्रकारों की सबसे बड़ी दुश्मन* *पुलिस मिलेगी यदि कोई पत्रकार किसी प्रकार की शिकायत करे तो कार्रवाई या तो होगी नहीं और यदि हुई भी तो किसी जोर दबाव में। लेकिन यदि पत्रकार के विरुद्ध शिकायत हुई तो बिना जांच पड़ताल मुकदमा दर्ज हो जाएगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा। इसलिए सरकार को पत्रकारों के हित में अलग कानून बनाना चाहिए। जिससे कि इन्हें सुरक्षा ब्यवस्था प्रत्येक थाने में तुरंत मिल सके और समाचार* *संकलन में सभी सरकारी गैर सरकारी विभागों में भरपूर सहयोग मिले समाचार संकलन में सहयोग न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई का नियम लागू हो।जीविकोपार्जन हेतु सरकार मानदेय लागू करे। मंत्री बिधायक आदिकों की भांति एक आवास की व्यवस्था हो इनके बच्चों को उच्च शिक्षा की मुफ्त ब्यवस्था हो। बुढापे में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की भांति पेंशन दी जाए। सर्वेक्षण कराकर उन पत्रकारों को आर्थिक सहायता दी जाए जो गरीबी की जिंदगी जीते हुए भी कलम के माध्यम से देश और समाज की सेवा में लगे हैं। ये सब तभी संभव है जब हममें एकता हो। तमाम संगठन पत्रकारों के देश भर बने हैं और सबका उद्देश्य भी एक ही किंतु फिर भी हम विभिन्न भागों में बंटे हुए हैं। बंटने का कारण तो मेरी समझ में एक ही है सभी अपने आप को बड़ा दिखाना चाहते हैं सब राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम चाहते हैं। ठीक है नाम सबका ऊपर होना चाहिए। किंतु हम छोटे पत्रकारों के साथ साथ सभी पत्रकार वंधुओं का हित हमारे संगठनों के सभी पदाधिकारी वंधुओं को देखना चाहिए। इसलिए मेरा मानना है कि देश भर के सभी पत्रकार संगठनों को एक होकर पत्रकारों के हित में विशेष कानून बनाने के लिए सरकार को मजबूर कर देना चाहिए वर्ना अब सुरक्षित नहीं हैं। ये लेख मेरा ब्यक्तिगत विचार है न मैं किसी पत्रकार संगठन के विरुद्ध हूं और न ही किसी पत्रकार भाई के विरुद्ध हूं। मुझसे बहुत अनुभवी और वुद्धिमान व कलमकार देश और समाज में मौजूद हैं मैं सबको नमन करता हूं लेकिन मांग भी करता हूं कि पत्रकारों के हित में अलग आरक्षण और कानून के लिए आप सभी वरिष्ठ जन प्रयास करें क्यों कि पत्रकारिता अब खतरे में है और मिलकर अपने हक की लड़ाई लडना होगा*!

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