त्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election) को लेकर एक तरफ राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है. तीसरे चरण की वोटिंग खत्म हो चुकी है. इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में निर्वाचन आयोग की मुसीबत लगातार बढ़ती जा रही है. निर्वाचन आयोग ने मुसीबत से निजात पाने के लिए अब लंगूरी बंदर का सहारा लिया है. दरअसल, पीलीभीत में 23 फरवरी को मतदान होने वाले हैं. EVM और VVPAT की निगरानी के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा 50 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन बंदरों ने इन्हें तोड़ देते है. जिससे अधिकारियों में खलबली मच गई और आनन-फानन में बैठक बुलाई गई.
बैठक के बाद यहां की सुरक्षा वन विभाग के हवाले कर दी गई. कुछ दिन तक 24 घंटे 3 शिफ्ट में आसमान से लेकर जमीन तक सुरक्षा लगा दी गई और बंदरों को कुछ हद तक रोका गया. वहीं बंदरों को पिंजरों में भरकर जंगलों में छोड़ा गया, लेकिन कुछ दिन बाद बंदर फिर से वापस आने लगे. झुंड के झुंड रात में आकर कैमरे को नुकसान करने लगे. इनके अलावा 6 अन्य वन्यकर्मियों को भी ड्यूटी पर लगाया गया है. टीम का काम न केवल बंदरों को मंडी परिसर से दूर रखना है, बल्कि उन्हें पकड़ कर जंगलों में छोड़ना भी है.ऐसे में पीलीभीत निर्वाचन आयोग ने यह फैसला किया अब यहां पर लंगूरी बंदर तैनात किया जाए. पीलीभीत के जिला चुनाव अधिकारी राम सिंह गौतम ने बताया कि मंडी में लंगूर को लाया गया है ताकि वहां रखे सभी उपकरणों को बचाया जा सके. इस बारे में उप क्षेत्रीय वन अधिकारी शेर सिंह ने कहा, यहां पर स्ट्रांग रूम बना है और उनके निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जो बंदर तोड़ गए थे. इनकी सुरक्षा के लिए वन विभाग की टीम के साथ लंगूरी बंदर भी तैनात किया गया है. पीलीभीत जिले में पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में बीजेपी ने चारों सीटें जीती थीं.
