बलिया (यूपी):
भाद्र मास के कृष्ण पक्ष के प्रथम शनिवार को मनियर के उत्तर टोला स्थित ऐतिहासिक शनिचरा बाबा स्थान पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी तुरैहा समाज द्वारा पूरे विधि-विधान के साथ शनिचरा बाबा का पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।
150 वर्ष पुराना है इतिहास और मान्यता
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, शनिचरा बाबा स्थान का इतिहास लगभग 150 वर्ष पुराना है। कहा जाता है कि सरयू नदी में आई बाढ़ के दौरान नेपाल से बहकर एक शिला मनियर पहुंची थी। जब किसी से वह शिला नहीं उठी, तब तुरैहा समाज के सरजू तुरहा ने उसे उठाया। हालांकि, वर्तमान मंदिर वाले स्थान पर पहुंचते ही शिला वहीं स्थिर हो गई। उसी रात स्वप्न में मिले निर्देश के बाद सरजू तुरहा ने वहां शिला की स्थापना कर पूजा-अर्चना शुरू की, जिसे आज शनिचरा बाबा के रूप में पूजा जाता है। क्षेत्र में यह लोक आस्था भी है कि बाबा के दरबार में आने से विषैले जंतुओं के काटने का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
सेवा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
शरबत वितरण: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 'शनिचरा बाबा शिक्षा सेवा समिति' द्वारा रोआब्जा शरबत के स्टॉल लगाए गए, जिसमें डॉ. विनय कुमार तुरैहा, डॉ. विजय शंकर और ललन प्रसाद तुरैहा का मुख्य सहयोग रहा।
झांकी और सांस्कृतिक संध्या: मनियर परशुराम स्थान पर आयोजित भव्य झांकी कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व विधायक भगवान पाठक ने दीप प्रज्वलित कर किया।
बनारस के कलाकारों की प्रस्तुति: बनारस से आए 'बाबा काली आर्ट्स झांकी ग्रुप' के कलाकारों ने शिव-पार्वती और राधा-कृष्ण के भजनों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गणमान्य लोगों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर आयोजक मंडल (पराग तुरैहा, सुधीर तुरैहा, राजन तुरैहा, कमलेश तुरैहा, पप्पू भाई) के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र नाथ त्रिपाठी, युवा संगठन अध्यक्ष गोपाल जी, सपा नेता धर्मेंद्र मणिक, सभासद अभय कुमार सिंह (वार्ड न. 7) सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. विनय तुरैहा ने किया।


