नई दिल्ली: NEET-UG परीक्षा पेपर लीक विवाद और देशव्यापी छात्र आंदोलन के भारी दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि यह निर्णय देश के युवाओं के हित और लोकतांत्रिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए लिया गया है। जंतर-मंतर पर 36 दिनों से जारी था आंदोलनकॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में पिछले 36 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहा था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य और गैर-समझौतावादी मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ही थी। इस आंदोलन को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन और उनके 26 दिनों के अनशन से जबरदस्त राष्ट्रीय गति मिली थी।
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे पर क्या कहा? अपने पत्र में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा: "पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से मैं गहराई से आहत हूं। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की बात नहीं है। देश का युवा हमारी असली ताकत है। मैं नहीं चाहता कि हमारे छात्रों का भविष्य कानूनी उलझनों या राजनीतिक गतिरोध में फंसे।" उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने शुरू से ही परीक्षा माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का प्रयास किया है और CBI जांच भी जारी है। "लोकतंत्र की जीत": छात्र समर्थकों में जश्न का माहौलशिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर मिलते ही जंतर-मंतर पर डटे छात्रों और CJP कार्यकर्ताओं के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। CJP के संस्थापकों और छात्र नेताओं ने इसे "अहिंसक आंदोलन और युवा शक्ति की ऐतिहासिक जीत" करार दिया। सोनम वांगचुक और अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे भारत में राजनीतिक जवाबदेही का एक नया अध्याय बताया।

