प्रदीप बच्चन (ब्यूरो चीफ)
बलिया (यूपी) भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर पिछले वर्ष 27 नवंबर 2025 को महिल एवं बाल विकास मंत्रालय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी के सौजन्य से 100 दिवसीय कार्यक्रम का प्रस्ताव जारी किया गया। जनपद की जागरूक संस्था नव भारतीय नारी विकास समिति बहेरी,बलिया उतर प्रदेश के द्वारा 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त अभियान का संचालन सफलता पूर्वक पूर्ण किया गया। जिसका समापन एवं सम्मान समारोह का आयोजन 18 मार्च 2026 दिन बुधवार को बापू भवन टाउन हाल में किया गया।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पदमावाती (ए सी एम ओ), डॉ० मंजु रानी (डिप्टी सी एम ओ) शामिल रहे।
बताते चले कि 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत जिले के गांवों व कस्बों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ एवं 100 दिवसीय अभियान की यात्रा के समापन के अवसर पर एक कार्यक्रम में नव भारतीय नारी विकास समिति बहेरी,बलिया के निदेशक श्री अजहर अली ने कहा कि हमारे प्रयासों को मिली प्रतिक्रिया से हम आश्वस्त हैं कि बाल विवाह मुक्त (बलिया जिला ) और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के बेहद करीब हैं। ...(नव भारतीय नारी विकास समिति ) बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए जमीन स्तर पर काम कर रहे। 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है। जिला बलिया उतर प्रदेश में बाल विवाह मुक्ति रथ को दिनांक 23/01/2026 को डाक बंगले से (श्री सनातन पाण्डेय बलिया संसद समाजवादी पार्टी) ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इन 30 दिनों में बाल विवाह मुक्ति रथ ने जिले में (800) किलोमीटर यात्रा की। यह रथ (गांवों की 700) गांवों तक पहुंचा और (4000) लोगों को बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ा।
‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के साल भर पूरा होने के अवसर पर भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने चार दिसंबर, 2025 को देशव्यापी ‘100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान’ का एलान किया था। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों ने इस अभियान की मोर्चे से अगुआई करते हुए देश के 439 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने के लिए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ निकाले। इस रथ ने जिले के तमाम गांवों और कस्बों में घूम-घूम कर लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा व आजीविका पर दुष्परिणामों से अवगत कराया और इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए समझाया कि बाल विवाह दंडनीय अपराध है। प्रमुख सड़कों और बेहतर पहुंच वाले मार्गों से ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ गुजरे। जबकि संपर्क के लिहाज से मुश्किल सुदूर गांवों तक साइकिल कारवां के जरिए पहुंचा गया ताकि बाल विवाह मुक्त (बलिया) का संदेश सबसे आखिरी छोर तक पहुंच सके।
....(नव भारतीय नारी विकास समिति ) के निदेशक अजहर अली ने बाल विवाह के खिलाफ इस 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान और इसके तहत निकाले गए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि “यह कोई प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी। यह पहियों पर बदलाव का संदेश था। जिसे लोगों ने स्वीकार किया और सराहा। अब लगभग पूरी सभ्य दुनिया ने हमारी यह बात मान ली है कि बाल विवाह कोई सामाजिक कुप्रथा नहीं बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों से बलात्कार है। यह एक अपराध है और कानूनन दंडनीय है। बाल विवाह किसी भी बच्ची के जीवन के पुष्पित-पल्लवित होने की संभावनाओं को ही खत्म कर देता है और बच्चियों को कुपोषण, अशिक्षा व गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है।”
उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से यह अभियान एक व्यापक जनभागीदारी वाले जन अभियान में तब्दील हो गया। सभी के सहयोग से बाल विवाह के खात्मे के लिए कानून, सुरक्षा और जवाबदेही के संकल्प को हम जनसमुदाय तक ले गए ताकि बाल विवाह मुक्त ...(जिला बलिया) का लक्ष्य वास्तविकता में बदल सके।
तीन चरणों में चले इस अभियान के पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों व दूसरे चरण में धर्मगुरुओं को जोड़ा गया और उनसे अनुरोध किया गया कि वे विवाह संपन्न कराने से पूर्व आयु की जांच कर लें और बाल विवाह संपन्न कराने से इनकार करें। साथ ही, कैटरर्स, सजावट वालों, बैंक्वेट हाल मालिकों व विवाह में सेवाएं देने वाले बैंड वालों, घोड़ी वालों से संपर्क कर अनुरोध किया गया कि वे बाल विवाह में अपनी सेवाएं नहीं दें। क्योंकि बाल विवाह में किसी भी रूप में शामिल होने या सहयोग देने पर उन्हें सजा हो सकती है। तीसरे चरण में जिले की पंचायतों में जागरूकता अभियान चलाया गया। कार्यक्रम समापन के दौरान इस मुहिम में सक्रियता से कार्य करने वाले सैकड़ों युवक/युवतियों,महिला/ पुरुष व वरिष्ठ मीडिया कर्मियों को अंग वस्त्र,मोमेंटो दे कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर जनपद के हजारों लोग मौजूद रहे।
