दुकानों पर नाम लिखने का योगी जी का आदेश देश की सामाजिक संरचना के अनुरूप - शिव सेना
Type Here to Get Search Results !

Recent Tube

दुकानों पर नाम लिखने का योगी जी का आदेश देश की सामाजिक संरचना के अनुरूप - शिव सेना

 


मनोज तिवारी ब्यूरो प्रमुख अयोध्या:--

संविधान की हत्यारी कांग्रेस को संविधान पर हमले की बात करने का नैतिक अधिकार नहीं - अभय द्विवेदी 

  लखनऊ /अयोध्या

 शिव सेना  के प्रदेश अध्यक्ष  अभय द्विवेदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा के मार्ग के दुकानदारों को अपनी दुकानों, रेहड़ी, और ठेलों पर अपना नाम लिखने को अनिवार्य बनाने  के  आदेश का स्वागत करते  हुए  देश की सामाजिक संरचना के अनुरूप बताया। उन्होंने  आदेश का विरोध करने वाले तत्वों को संविधान विरोधी घोषित किया। उन्होंने कहा कि योगी जी का आदेश कांवड़ियों को थूक जेहाद और हलाल मार्का खाद्य वस्तुओं से बचाने और श्रद्धालुओं की पवित्रता की रक्षा में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम  कहा।  योगी आदित्यनाथ का यह आदेश शिव सेना  के धर्मयुद्ध की नीतियों के अनुरूप है, जिसका शिव सेना स्वागत करती है और इस नीति को राष्ट्रीय स्तर पर हमेशा के लिए स्थाई रूप से लागू करने की मांग करती है। 


    शिव सेना  प्रदेश अध्यक्ष ने आज जारी बयान में यह जानकारी देते हुए कहा कि विपक्षी दल और एन डी ए के कुछ घटक दल योगी जी के आदेश की आलोचना कर आदेश को धर्म और जाति के चश्मे से देखने का प्रयास कर रहे हैं। यह उचित नहीं है। 


     शिव सेना के  अवध प्रांत प्रचारक उमेश मिश्रा ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी द्वारा योगी जी के आदेश को संविधान पर हमला बताने पर कड़ा प्रतिरोध व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान के हत्यारों को संविधान पर हमले की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले ही कांग्रेस के आपातकाल लगाने के दौर को संविधान हत्या दिवस घोषित किया है। जो स्वयं संविधान की हत्या के दोषी हैं, उनके मुख से संविधान पर हमले की बात करना पूरी तरह से अनुचित है।


      उमेश मिश्रा ने एन डी ए के घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल द्वारा योगी जी के आदेश को जाति और धर्म से जोड़ने पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि योगी जी ने आदेश में दुकानों पर धर्म या जाति लिखने का नहीं वरन दुकानदार को केवल अपना नाम लिखने का  आदेश दिया है। दुकानदार के नाम को जाति और धर्म के चश्मे से देखना भारतीय लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad

Hollywood Movies